कैबिनेट ने दी मंजूरी:प्राॅपर्टी टैक्स काे गाइडलाइन से जाेड़ने का फाॅर्मूला, कम नहीं होगा संपत्ति कर, पर 10% से ज्यादा बढ़ेगा भी नहीं
संपत्ति कर काे कलेक्टर गाइडलाइन से जाेड़ने का नया फाॅर्मूला बनकर तैयार है। इसके मुताबिक प्रदेश में कहीं भी मौजूदा संपत्ति कर कम नहीं किया जाएगा, लेकिन यह ध्यान रखा जाएगा कि कहीं भी ये 10 फीसदी से ज्यादा नहीं हो। इस फाॅर्मूले काे अगले वित्त वर्ष से लागू करने की तैयारी है। मंगलवार को कैबिनेट ने भी अधिनियम में संपत्ति कर को कलेक्टर गाइडलाइन से जोड़ने संबंधी संशोधन को हरी झंडी दे दी। अभी संपत्ति कर की गणना जोन के हिसाब से तय की जाती है। इसमें बड़ी विसंगति यह है कि जोन में शामिल सभी प्राॅपर्टी के कर की गणना एक ही आधार पर होती है। जोन के लिए एन्युअल लेटिंग वैल्यू तय कर दिया जाता है। उसके आधार पर संपत्ति कर की गणना की जाती है। इससे सस्ती और महंगी दोनों ही प्रॉपर्टी के लिए संपत्ति कर समान हो जाता है। इसी विसंगति को अब दूर किया जा रहा है।
जोनवार ऐसे होती है गणना
शहर को अलग जोन में बांटते हैं, जैसे- भोपाल 8 जोन में बंटा हुआ है। फिर जोन के एएलवी के अनुसार छह से 10% तक संपत्ति कर होता है। इसमें आवासीय, व्यावसायिक व औद्योगिक प्रॉपर्टी के हिसाब से एएलवी तय होता है। आवासीय में भी कच्चे, पक्के, टीन या कवेलू की छत आदि के आधार पर एएलवी निर्धारित होता है।
अब यह हाेगी नई व्यवस्था
जोन की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। गाइडलाइन में किसी जगह की जमीन की जो दर तय होगी, उसी का निश्चित प्रतिशत प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में वसूला जाएगा। इससे महंगी और सस्ती प्रॉपर्टी में एक समान टैक्स नहीं लगेगा। गाइडलाइन में इजाफा या कमी होने पर प्रॉपर्टी टैक्स भी ज्यादा या कम हो जाएगा।
