पंजाब में फर्जी एनकाउंटर मामले में 5 रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों को उम्रकैद, 3.5 लाख का जुर्माना
मामला 30 जून 1999 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जम्मू द्वारा दर्ज किया गया था. यह मामला पहले 1996 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रारंभिक जांच के रूप में शुरू हुआ था, जो कि क्रिमिनल रिट याचिका (परमजीत कौर बनाम पंजाब राज्य) के तहत दायर की गई थी.
12 जुलाई 1993 को शिंदर सिंह, देशा सिंह, बलकार सिंह और मंगल सिंह को DSP भूपिंदरजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने फर्जी एनकाउंटर में मार दिया. फिर 28 जुलाई 1993 को सुखदेव सिंह, सरबजीत सिंह उर्फ सबा और हरविंदर सिंह को वेरोवाल पुलिस टीम ने नकली मुठभेड़ में मारा.
CBI ने इस मामले में 31 मई 2002 को 10 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी:
- 1. DSP भूपिंदरजीत सिंह
- 2. ASI देविंदर सिंह
- 3. ASI गुलबर्ग सिंह
- 4. इंस्पेक्टर सुबा सिंह
- 5. ASI रघुबीर सिंह
- 6. इंस्पेक्टर गुरदेव सिंह (मृत्यु हो चुकी है)
- 7. SI जियान चंद (मृत्यु हो चुकी है)
- 8. ASI जगीर सिंह (मृत्यु हो चुकी है)
- 9. हेड कांस्टेबल मोहिंदर सिंह (मृत्यु हो चुकी है)
- 10. हेड कांस्टेबल अरूर सिंह (मृत्यु हो चुकी है)
1 अगस्त 2025 को विशेष कोर्ट ने 5 जीवित आरोपियों को दोषी ठहराया था और अब 4 अगस्त को सजा सुनाई गई.
