फ़र्ज़ी भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का संचालन – कोर्ट के आदेश पर रविकांत चौहान के खिलाफ एफआईआर दर्ज
आगरा। शारीरिक रूप से दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ियों के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। न्यायालय ने डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (DCCI) के महासचिव रविकांत चौहान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टयता यह माना कि रविकांत चौहान द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर व्यक्तिगर लाभ के लिए नियम विरुद्ध कार्य किये जा रहे हैं
मामला
2011 में डिसेबल्ड स्पोर्टिंग समिति के रूप में पंजीकृत संस्था का नाम 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा “विकलांग” शब्द के स्थान पर “दिव्यांग” शब्द की परिभाषा दिए जाने के बाद बदलकर दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया (DCCBI) कर दिया गया। संस्था ने राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का विधिवत गठन एवं संचालन प्रारंभ किया।
इसके बावजूद वर्ष 2021 में डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (DCCI) नामक संस्था अस्तित्व में आई और भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का अनधिकृत संचालन शुरू कर दिया।
DCCBI द्वारा पत्र और नोटिस के माध्यम से चेतावनी देने के बाद भी रविकांत चौहान ने टीम संचालन जारी रखा। परिणामस्वरूप, DCCBI के महासचिव श्री हारून रशीद ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
आधिकारिक वक्तव्य
अध्यक्ष (DCCBI) एडवोकेट इकरांत शर्मा ने कहा:
“भारत एक है तो भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम भी एक ही होगी। अधिनियम १८६० के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन के आलावा DCCBI के पास भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के संचालन का विधिवत संविधान है। हमारी संस्था नीति आयोग, MSME, आयकर विभाग, मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट सीएसआर तथा कॉपीराइट एक्ट (भारत सरकार) के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत है।”
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री दुर्गविजय सिंह भैया (DCCBI के अधिवक्ता) ने बताया:
“विपक्षी द्वारा BCCI नाम का दुरुपयोग कर देशभर में भ्रम फैलाया गया। जांच में स्पष्ट हो गया कि DCCI केवल कर्नाटक सोसाइटी एक्ट 1960 के तहत पंजीकृत है और उसे कर्नाटक से बाहर कार्य करने का कोई अधिकार नहीं है। इसके बावजूद बैंक खाता लखनऊ में और संचालन बल्लभगढ़ से किया गया, जो स्पष्ट रूप से नियमविरुद्ध है।” अपने कार्य क्षेत्र से बाहर जाकर खिलाड़ियों और अधिकारीयों को विदेश यात्रा एक प्रकार से जान जोखिम में डालना बैंक खाते से भी स्पष्ट होता है कि उपरोक्त संस्था के पदाधिकारी व्यक्तिगत लाभ के लिए प्रायोजकों से लिए धन का दुरूपयोग कर रहे हैं जो धन का लाभ खिलाडियों को मिलचहिये वो उनको नहीं मिल रहा
