पन्ना। जिले के चर्चित खनिज ठेकेदार एवं कांग्रेस नेता श्रीकांत दीक्षित पप्पू एवं उनके परिजनों की बेशुमार अचल संपत्ति से जुड़े नित नए हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं, इसी कड़ी में एक और चकित करने वाला मामला उजागर हुआ। पप्पू एवं अनुपम त्रिपाठी पर ग्राम मनौर में स्थित गरीब आदिवासी परिवार की बेशकीमती भूमि को अवैध तरीके से क्रय कर कब्जाने का आरोप लगा है। दो आदिवासी महिलाओं ने पन्ना कलेक्टर से लिखित शिकायत की है कि, उनके पिता जगोला आदिवासी की मृत्यु के पश्चात फर्जी तरीके से राजाराम सौंर को एकमात्र फर्जी पुत्र बनाकर उससे 2 हेक्टेयर कृषि भूमि श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी द्वारा कथित तौर पर अवैध तरीके से क्रय की गई। आवेदिकाओं का दावा है कि उनका कोई भाई नहीं है। इस तथ्य की पुष्टि उनके निकट संबंधियों एवं साक्षियों द्वारा शपथ पत्र देकर की गई है। शपथ पत्र में लेख किया गया है कि जगोला की सिर्फ दो पुत्रियां है कोई पुत्र नहीं है।
कलेक्टर सुरेश कुमार द्वारा ग्राम मनौर में गरीब आदिवासी परिवार की अवैध रूप से जमीन कब्जाने के प्रकरण में टिकुरिया मोहल्ला पन्ना निवासी श्रीकांत दीक्षित पिता स्व. भास्कर दीक्षित एवं इंद्रपुरी कॉलोनी पन्ना निवासी अनुपम त्रिपाठी पिता रामलखन त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी कर आगामी 15 सितम्बर को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए सुबह 11 बजे कलेक्टर न्यायालय में समक्ष में उपस्थित होने के लिए आहूत किया है अन्यथा मामले की सुनवाई और निपटारा के संबंध में आगामी कार्रवाई की जाएगी। जिला कलेक्टर ने तहसीलदार पन्ना को नोटिस की प्रतियां अनावेदकों को व्यक्तिशः तामील कराने तथा तामीली न होने पर संबंधितजन के निवास स्थल पर चस्पा कराने के निर्देश भी दिए हैं।
इस प्रकरण में ग्राम मनौर की नामांतरण पंजी प्रविष्टि क्रमांक 10 पर तहसीलदार पन्ना द्वारा पारित आदेश की प्रति के संबंध में मूल नामांतरण पंजी से मिलान की कार्यवाही की गई। इस दौरान पाया गया कि यह प्रविष्टि हल्का पटवारी द्वारा खसरा नंबर के खातेदार की 15 वर्ष पूर्व मृत्यु और उनकी पत्नी 10 वर्ष पूर्व फौत होना लेखकर उनके फर्जी पुत्र के पक्ष में नामांतरण किए जाने के संबंध में दर्ज की गई थी। तहसीलदार पन्ना द्वारा मृतक के स्थान पर वारिश के नाम नामांतरण स्वीकृत किया गया। मूल नामांतरण पंजी के साथ उद्घोषणा पत्र चस्पा है, किंतु तामीली, मुनादी या प्रकाशन कराने संबंधी कोई रिपोर्ट इसमें अंकित नहीं है। 9 नवम्बर 2020 की नकल अनुसार पंजीकृत विक्रय पत्र 05 सितंबर 2020 के आधार पर श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी के पक्ष में स्वीकृत किया गया है। इस मामले में दस्तावेजों के अवलोकन उपरांत पाया गया कि प्रश्नाधीन भूमि जगोला पिता बल्दुआ गौड़ निवासी मनौर के नाम दर्ज रही है, जबकि जैतुपुरा निवासी राजाराम आदिवासी गौड़ नहीं बल्कि सौंर जनजाति के हैं।
अनावेदकों द्वारा फर्जी तरीके से जमीन क्रय करने के बाद प्रभावित परिवार को भूमि पर फसल बोने से मना करने पर जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को इसकी शिकायत की गई थी। दोनो बहनों द्वारा क्रेता अनुपम त्रिपाठी और श्रीकांत दीक्षित से कई बार संपर्क साधा गया, लेकिन अनावेदकों ने जातिगत अपमान करते हुए गाली-गलौंच कर भगा दिया। ससुराल में भरण पोषण के लिए पर्याप्त भूमि नहीं होने पर उक्त भूमि वापस दिलाने तथा फर्जीवाड़ा करने वाले क्रेताओं के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करने की मांग की गई। इस संबंध में प्रश्नाधीन सर्वे नंबर की भूमि के राजाराम सौंर के पक्ष में किए गए नामांतरण आदेश को म.प्र. भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 50 के तहत पुनरीक्षण में लिया जाकर तहसीलदार पन्ना का 28 जुलाई 2018 का आदेश निरस्त कर मूल भूमि स्वामी जगोला गौड़ पिता बल्दुआ के वैध वारिसों के नाम पुनः दर्ज करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।