मालव्य राजयोग से चमक उठेगी 3 राशियों की किस्मत, आय-मान में वृद्धि, नौकरी में प्रमोशन, धनलाभ के प्रबल योग
तिष में शुक्र को दैत्यों का गुरू माना जाता है। शुक्र हर माह चाल बदलते है जिससे योग राजयोग का निर्माण होता है। इसी क्रम में दिवाली बाद धन, वैभव, ऐश्वर्य के दाता शुक्र मालव्य राजयोग बनाने जा रहे है।वर्तमान में शुक्र सिंह राशि में विराजमान है । 2 नवंबर को शुक्र अपनी स्वामी राशि तुला में प्रवेश करेंगे और 25 नवंबर तक यहीं रहेंगे, ऐसे में तुला राशि में शुक्र मालव्य राजयोग बनाएंगे जो 3 राशियों के लिए बेहद लकी साबित होने वाला है।
तुला राशि मालव्य राजयोग जातकों के लिए अनुकूल सिद्ध हो सकता है। व्यक्तित्व में निखार होगा। विवाहितों का वैवाहिक जीवन खुशनुमा रहेगा। अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते है। नौकरीपेशा को नए अवसर मिल सकते है। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। मान- सम्मान की प्राप्ति होगी। कानूनी मामलों में फैसला आपके पक्ष में आ सकता है। पार्टनरशिप के काम में लाभ मिल सकता है।
मकर राशि मालव्य राजयोग जातकों के लिए शुभ फलदायी सिद्ध हो सकता है। कारोबार का विस्तार हो सकता है। आय में वृद्धि हो सकती है, नए नए स्त्रोत खुल सकते है। मीडिया, फैशन डिजाइनिंग, फिल्म लाइन और मॉडलिंग से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ मिल सकता है। हर क्षेत्र में सहयोग मिलेगा। नौकरी व व्यवसाय में उन्नति होगी ।लंबी दूरी की यात्रा कर सकते है। आर्थिक स्थिति अच्छी होगी । बेरोजगारों को नौकरी के अवसर मिल सकते है। व्यापारियों को नए ऑर्डर मिल सकते हैं।
धनु राशि मालव्य राजयोग जातकों के लिए लकी साबित हो सकता है। भाग्य का साथ मिलेगा। मान – सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। ।कारोबार के चलते छोटी व लंबी यात्रा कर सकते हैं। लंबे समय से अटके और रूके हुए कामों को गति मिल सकती है। आय में वृद्धि के साथ नए नए स्त्रोत बन सकते हैं।निवेश से लाभ मिल सकता है। संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार मिल सकता है। व्यापारियों को कोई बड़ी व्यवसायिक डील मिल सकती हैं।
कुंडली में कब बनता है मालव्य
मालव्य राजयोग शुक्र से संबंधित है, जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र लग्न से अथवा चन्द्रमा से केन्द्र के घरों में स्थित है अर्थात शुक्र यदि कुंडली में लग्न अथवा चन्द्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में वृष, तुला अथवा मीन राशि में स्थित है तो कुंडली में मालव्य राजयोग बनता है। अगर शुक्र ग्रह पर सूर्य या गुरु की दृष्टि पड़ रही है तो इस राजयोग का फल व्यक्ति को कम प्रदान होगा। क्योंकि सूर्य और गुरु का शुक्र के साथ शत्रुता का भाव है।
