ग्वालियर में 25 हजार करोड़ की जमीन पर बनवा दी पॉश टाउनशिप_कौन कौन है हिस्सेदार
शासन प्रशासन बिल्डर्स और भू माफियाओं के झांसे में न आएँ क्योंकि ये सब एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं
एंकर -: आप अपने और अपने परिवार के लिए सपनों के आशियाना बनाने से पहले क्या देखते हैं। किसी से जमीन मकान या फ्लैट लेने से पहले आप क्या जाँच करते हैं तो आपका जवाब होगा की सबसे पहले सरकारी कागजों के आधार पर हम यह तय करते हैं कि जमीन सरकारी है या निजी विक्रेता के नाम है या फिर किसी अन्य व्यक्ति के नाम। और जब आप वेरीफाई भी करते हैं तब भी आप राजस्व विभाग यानी प्रशासन का ही सहारा लेते हैं। लेकिन तब क्या हो जब प्रशासनिक अधिकारी ही भू माफियाओं के साथ मिलकर आपकी मेहनत की कमाई हड़पने में जुटे हों आपको धोखा दे रहे हों । देखिए ungali.in की ये खास रिपोर्ट
अखबारों में छपने वाले फुल पेज के विज्ञापन के छलावे में आए हजारों उपभोक्ता_सपनों के आशियाने पर चलेगा बुलडोजर
ग्वालियर के सिटी सेंटर जैसे पॉश इलाके में ऊँची ऊँची आलीशान इमारतें बड़ी बड़ी सर्व सुविधायुक्त टाउनशिप महँगे फ्लैट डुप्लेक्स के अखबारों में छपने वाले फुल पेज के विज्ञापन के झांसे में यदि आप आ गए हैं तो जरा सम्हलकर क्योंकि आपकी जरा सी लापरवाही से आपकी जिंदगी भर की पूंजी खत्म हो सकती है। क्योंकि आपसे लुभावने वादे करके आपकी जिंदगी भर की कमाई को ऐंठने वाले इन टाउनशिप के कर्ताधर्ताओं द्वारा सरकारी जमीन पर मकान फ्लैट बनाकर आपको बेचे जा रहे हैं और ये हम नहीं कह रहे ये खुलासा किया है याचिकाकर्ता चंद्रशेखर साहू के वकील विभोर साहू ने। एडवोकेट विभोर साहू ने सिटी सेंटर इलाके की आधा दर्जन से ज्यादा टाउनशिप और निजी भू माफियाओं द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मामले में याचिका दायर की है जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और अब कोर्ट ने जिला प्रशासन से जवाब मांँगा है कि कैसे आपकी नाक के नीचे बड़ी मात्रा में जमीन पर कब्जा हो गया। यदि इस पॉश टाउनशिपों की जमीन शासकीय पाई जाती है तो इनमें रहने वाले लोगों के परिवार बेघर हो जाएँगे और सपने का आशियाना ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा।
भू माफिया और शासन प्रशासन के भ्रष्ट गठजोड़ पर हाईकोर्ट का हथौड़ा
ग्वालियर में जल जंगल और जमीन हर तरफ भू माफिया काबिज हैं और ये हम नहीं कह रहे ये खुलासा किया गया है ग्वालियर हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में। याचिकाकर्ता चंद्र शेखर साहू के मुताबिक सिटी सेंटर इलाके में 25 हजार करोड़ रुपए मूल्य की 54 हैक्टेयर पर भू माफियाओं द्वारा अफसरों की मिलीभगत से अतिक्रमण कर दिया गया है। ये घोटाला सरकारी डाटा के आधार पर उजागर गया है लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है।
अहम बात यह है कि जब याचिका कर्ता चंद्रशेखर साहू ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की उसे समय संबंधित शासकीय विभागों ने पल्ला झाड़ते हुए सीधे तौर पर कह दिया कि यह हमारा मामला नहीं है इसमें बिल्डर और कॉलोनाइजर्स ने अतिक्रमण किया है तो आप उन्हें ही पार्टी बनाएं लेकिन हाईकोर्ट ने इस संबंध में फिलहाल शासकीय विभागों से ही जवाब मांगा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सिटी सेंटर के डूंगरपुर से लेकर शिरोल तक के छोटे से इलाके में 25000 करोड़ से ज्यादा की शासकीय भूमि पर कब्जाधारी भू माफियाओं को सजा मिलती भी है तो इसका दंड कहीं ना कहीं इन टाउनशिप में महंगे फ्लैट लेकर रहने वालों पर पड़ेगा। बहरहाल सुनवाई जारी है और कोर्ट के आदेश का पालन शासकीय विभाग कॉलोनाइजर और बिल्डर सभी को करना पड़ेगा जिसका असर सीधे तौर पर उन उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है जो बिल्डरों और सरकारी विभागों की जालसाजी का शिकार हो चुके हैं
