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ग्वालियर में धर्मांतरण: बच्चों को धर्मगुरु बनने की ट्रेनिंग, पांच राज्यों के गरीब-आदिवासी मासूम मिले?

ग्वालियर के बड़ागांव क्षेत्र स्थित बिशप निवास परिसर के एक सेंटर में 26 बच्चों को धार्मिक शिक्षा दिए जाने की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ये बच्चे मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों के अलावा ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और केरल से लाए गए बताए जा रहे हैं। यह मामला उजागर होने के बाद विश्व हिन्दू परिषद और भाजपा दोनों आक्रमक है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।बताया गया है कि शहर से एकदम बाहर बना यह सेंटर ईसाई मिशनरी संगठन द्वारा संचालित है और यहां बच्चों को धार्मिक अध्ययन के साथ आध्यात्मिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बताया गया है कि उन्हें आगे चलकर धर्मोपदेशक के रूप में तैयार करने की योजना है। सेंटर शहर से लगभग दस किमी दूर है। धार्मिक अनुष्ठान और संस्कार शहर की मुख्य चर्चा के बजाय ग्रामीण इलाकों की चर्चों में आयोजित किए जा रहे हैं। इसकी सारी गतिविधिया संदिग्ध है।

अब तक की जांच पड़ताल में सामने आया कि संगठन का विशेष ध्यान आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी परिवारों पर है। परिवारों को बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य का आश्वासन देकर उन्हें इस कार्यक्रम में जोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह ट्रेनिंग जेसेफ़ टाइक़ाटिल बिशप के नेतृत्व मे दी जा रही है। हाल ही में डबरा में एक बच्चे का डीकन यानी धर्मगुरु बनाने का धार्मिक संस्कार किया गया था। इनके अलावा फादर हर्षल ए एक्स के पास इन बच्चो की पढ़ाई, खानपान की जिम्मेदारी है।

ग्वालियर के बिशप हाउस में धर्मांतरण की खबर के बाद पुलिस और इंटेलीजेंस की टीम मौके पर पहुंची है। पूछताछ की जा रही है। मौके पर जांच टीम को 26 बच्चे मिले हैं जो निम्न और गरीब आदिवासी परिवार के बच्चे हैं। हालांकि बिशप के प्रबंधन का कहना है कि बच्चों को सामाजिक और धार्मिक ट्रेनिंग दी जा रही है। धर्मांतरण जैसा कोई मामला नहीं है। बिशप हाउस में 26 बच्चे मौजूद हैं जो कि अलग-अलग राज्यों से आए हैं। प्रशासन अपना काम कर रहा है जो सच है वह निकलकर आएगा। संभावित धर्मानतरण की जाँच के लिए एडीएम सीबी प्रसाद ने एक तीन सदस्यी जाँच कमिटी बनाई हे जिसमें अनुबिभागिय अधिकारी मुरार नरेश चंद्र गुप्ता ,एसडीओपी बेहट मनीष यादव और फार्म सोसायटी के पंजीयक बाबूलाल सोलंकी शामिल हैं .समिति पांच दिन में अपनी रिपोर्ट देगी .

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