16 नवंबर से 3 राशियों का गोल्डन टाइम, भाग्योदय, धनलाभ के प्रबल योग, पूरे होंगे अटके काम
वैदिक ज्योतिष अनुसार हर एक ग्रह एक निश्चित अवधि के बाद गोचर करता है, इस दौरान एक राशि में दो या इससे अधिक ग्रह आ जाए तो राजयोगा और युति और शुभ और अशुभ संयोग का निर्माण होता है, जिसका असर मानव जीवन और देश- दुनिया पर देखने को मिलता है। इसी क्रम में मंगल की राशि वृश्चिक में 16 नवंबर को ग्रहों का मेला लगने वाला है, जिससे त्रिग्रही योग बनेगा। वर्तमान में ग्रहों के सेनापति मंगल और ग्रहों के राजकुमार बुध वृश्चिक राशि में विराजमान है। ग्रहों के राजा और आत्मा पिता सम्मान के कारक सूर्य 16 नवंबर को तुला से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे त्रिग्रही राजयोग बनेगा। इसका प्रभाव 23 नवंबर तक बना रहेगा क्योंकि इसके बाद बुध तुला में प्रवेश कर जाएंगे।इसके अलावा सूर्य मंगल की युति से आदित्य योग और सूर्य बुध के संयोग से बुधादित्य योग का भी निर्माण होगा।
त्रिग्रही योग 3 राशियों के लिए लकी
वृश्चिक राशि पर प्रभाव तीन ग्रहों का गोचर और त्रिग्रही योग जातकों के लिए शुभ सिद्ध हो सकता है।भाग्य का साथ मिलेगा। काम- कारोबार में अच्छी तरक्की मिल सकती है। समाज में मान- सम्मान की प्राप्ति हो सकती है। छात्रों के लिए अनुकूल रहेगा।आय, साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी।शादीशुदा लोगों का वैवाहिक जीवन शानदार रहेगा। अटके रूके कामों को गति मिलेगी।प्रॉपर्टी या वाहन खरीद सकते हैं। बैंक से लोन लेने में सफल हो सकते हैं।
तुला राशि पर प्रभाव तीन ग्रहों का गोचर और त्रिग्रही योग जातकों के लिए लकी सिद्ध हो सकता है। इनकम में वृद्धि के अच्छे योग बनेंगे। विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी।वाहन घर या गहने खरीद सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। व्यापार में कोई नई डील हासिल हो सकती है। नया व्यापार शुरू कर सकते है। नौकरीपेशा के लिए भी कई अवसर मिलेंगे।आत्मविश्वास व साहस में वृद्धि हो सकती है।निवेश के लिए समय अनुकूल रहेगा।प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जातकों को विशेष फलों की प्राप्ति हो सकती है।
मिथुन राशि पर प्रभाव तीन ग्रहों का गोचर और त्रिग्रही योग का बनना जातकों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।किस्मत का पूरा साथ मिल सकता है। शत्रुओं को परास्त करने में सफल हो सकते हैं। कर्ज से मुक्ति मिलेगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जातकों को लाभ मिल सकता है। आत्मविश्वास, साहस और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।कोई नया प्रोजेक्ट या व्यवसाय में लाभ मिलेगा। साथ ही अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं।
कब बनता है बुधादित्य-मंगल आदित्य राजयोग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आदित्य का मतलब सूर्य से होता है इस तरह से जब कुंडली में सूर्य और बुध दोनों ग्रह एक साथ मौजूद हों तो बुधादित्य राजयोग बनता है।बुधादित्य योग कुंडली के जिस भाव में मौजूद रहता है उसे वह मजबूत बना देते है। कुंडली में बुध और सूर्य के एक साथ होने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।उसे धन, सुख-सुविधा, वैभव और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।जब कुंडली में सूर्य व मंगल साथ आते है तो मंगल आदित्य राजयोग का निर्माण होता है।
