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घने कोहरे में भी उड़ानें नहीं होंगी कैंसिल, दिल्ली एयरपोर्ट ने धुंध से मुकाबले के लिए कसी कमर

 नई दिल्ली। देश की सबसे बड़े एयरपोर्ट आईजीआई का संचालन करने वाली एजेंसी डायल का दावा है कि इस बार सर्दियों की घनी धुंध में भी उड़ानों को न्यूनतम रुकावट के साथ चलाने को वह पूरी तरह तैयार है। डायल का कहना है कि इसके लिए अगली पीढ़ी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और रनवे अपग्रेड के जरिए देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट को फाग-प्रूफ बनाया गया है।

आईजीआई में एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर (एपीओसी) बनाया गया है। यहां रियल-टाइम मौसम डेटा, हवाई यातायात की स्थिति और ग्राउंड आपरेशंस को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर सेकंडों में सही फैसले लिया जाएगा। इससे रनवे का बेहतरीन इस्तेमाल, गेट आवंटन में तेजी और फ्लाइट सीक्वेंसिंग में सटीकता आएगी।

पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रापिकल मेट्रोलाजी (आईआईटीएम) के विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (वाइफेक्स) में 85 प्रतिशत तक सटीकता वाले इस माडल से 36 घंटे पहले ही घने कोहरे का पता चल जाता है। इसके डेटा को दिल्ली एयरपोर्ट ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत अपने सिस्टम में जोड़ा है, जिससे एयरलाइंस, एटीसी और ग्राउंड स्टाफ पहले से तैयारी कर लेते हैं।

डायल के अनुसार आजीआई के तीनों मुख्य रनवे (11एल/29आर, 11आर/29एल और 10/28) दोनों सिरों से कैट-III इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम से लैस हो चुके हैं। द्वारका साइड पर रनवे 10/28 का हालिया अपग्रेड पूरा होने से अब जीरो विजिबिलिटी में भी सुरक्षित लैंडिंग संभव है और प्रति घंटे 30 लैंडिंग हो सकेंगी। इसके फलस्वरुप पहले धुंध के बाद नार्मल आपरेशन शुरू होने में छह घंटे लगते थे, अब सिर्फ दो घंटे लगेंगे।

डायल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विदेह कुमार जयपुरियार ने कहा कि कोहरा प्रकृति की देन है, लेकिन हम तकनीक और तैयारी से उसका असर यात्रियों पर न्यूनतम करेंगे। इस सर्दी में दिल्ली एयरपोर्ट न सिर्फ सुरक्षित, बल्कि सबसे भरोसेमंद रहेगा।

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