अमृत योजना के घटिया काम में अब मौत का आगाज़; डंपर से बुजुर्ग की मौत
ग्वालियर मध्य प्रदेश ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के अर्णव ग्रीन सिटी टाउनशिप में एक गिट्टी से भरे डंपर के पलटने से बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हो गई। अभी हाल ही में क्षेत्र में अमृत योजना के तहत पाइप लाइन डाली गई थी और इस पाइपलाइन का आधा अधूरा घटिया काम इस हादसे की वजह बना। बुजुर्ग को मौका तक नहीं मिला और उसी जगह पर वह गिट्टी से भरे डंपर के नीचे दब गया क्षेत्रवासी अब कह रहे हैं कि यह हादसा नहीं हत्या है और इसके दोषी नगर निगम के अधिकारी और अमृत योजना के ठेकेदार हैं। अमृत योजना के तहत डाली गई लाइन का घटिया निर्माण हमेशा से चर्चाओं में रहा है लेकिन किसी जिम्मेदार पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मृतक बुजुर्ग गिरजा 90 वर्ष के थे। वह मूलतः भरतपुर राजस्थान के रहने वाले हैं। उनके नाती ने बहुड़ापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत अर्णव ग्रीन सिटी में मकान बनाया था और वह अपने नाती के साथ रहते थे। ठंड का समय है। दोपहर 1 बजे के लगभग बुजुर्ग घर के बाहर धूप सेंक रहे थे उसी वक्त डंपर वहां से गुजरा। मोड़ पर जैसे ही डंपर मुड़ा वहां पहले से खुदी हुई अमृत योजना पाइपलाइन की कच्ची सड़क में डंपर का पिछला पहिया फंस गया। जैसे ही पिछला पहिया फंसा डंपर का बैलेंस बिगड़ा और वह बुजुर्ग के मकान की तरफ ही लुड़क गया बुजुर्ग ने जगह से उठकर भागने की कोशिश की। लेकिन बुजुर्ग को मौका ही नहीं मिला और पूरा डंपर उसके ऊपर जा गिरा।साथ ही डंपर की गिट्टियां भरभराकर उसके ऊपर गिर गई। हालांकि घटना के बाद परिजन तुरंत बुजुर्ग को अस्पताल ले गए जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बुजुर्ग की मौत के बाद क्षेत्रवासियों में आक्रोश है। वह इस घटना का जिम्मेदार नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों को बता रहे हैं। ऐसे कई हादसे पहले भी हो चुके हैं जिसके बारे में जिम्मेदार अधिकारियों को पता है कि किस तरह अमृत योजना का निर्माण नियमानुसार न होकर नियम विरुद्ध और आधा अधूरा चल रहा है। कहीं पर भी खुदाई के बाद अमृत योजना की लाइन में ठीक से भराव नहीं किया जाता। यह पहला हादसा नहीं है जब अमृत योजना के किए गए गड्ढों में कोई डंपर ट्रक फंसा हो। इससे पहले भी कई हादसे हो चुके हैं लेकिन गनीमत रही कि उन हादसों में कोई मौत नहीं हुई और मौत न होने के वजह से ही शायद जिम्मेदारों की नींद नहीं खुली और वह अभी भी ठेकेदारों के साथ जुगलबंदी करते हुए मदमस्त हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इस बुजुर्ग की मौत के बाद जिम्मेदारों का जमीर जागेगा?
अमृत योजना का निर्माण कार्य जब से शहर में शुरू हुआ यह लोगों के लिए जेहर बन चुकी है।कई क्षेत्रों में जब अमृत योजना के लिए सड़कें खोदी गई तो महीनों तक उनका भराव नहीं किया गया और वहां के क्षेत्रवासी अमृत योजना का दंश झेलते रहे अमृत योजना में इतनी घटिया पाइपलाइन डाली गई है जो आए दिन फूटती रहती है और फिर वहां पर उसकी रिपेयरिंग के लिए गड्ढे खोदे जाते हैं। अमृत योजना के तहत डाली गई पाइपलाइन। मैं कम प्रेशर से पानी सप्लाई किया जाता है।प्रेशर बढ़ाने पर पाइप लाइन प्रेशर सहन नहीं करती और फूट जाती हैं और प्रेशर कम होने पर कई क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंचता। पानी का प्रेशर इतना कम है कि पहली मंजिल पर पानी चढ़ाने के लिए भी टिल्लू पंप का प्रयोग करना पड़ता है।
अमृत योजना का काम करने वाले ठेकेदार अभी तक लापरवाही का ठेकेदार था। अव्यवस्था का ठेकेदार था। आधे अधूरे काम का ठेकेदार था लेकिन अब वह मौत का ठेकेदार भी बन चुका है। उसकी लापरवाही के चलते अब आमजन जान भी गंवा रहे हैं और ऐसे ठेकेदारों को इस तरह मौत का लाइसेंस।नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने दिया है। अब सवाल यह उठता है कि इन मौत के ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई होगी या ये जो मौत का सिलसिला शुरू हुआ है यह आगे इसी तरह चलता रहेगा
