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सरकारी स्कूल में क्वालिटी एजुकेशन के दावे फेल; प्राइवेट स्कूल संख्या में कम लेकिन उनमें छात्र दो गुने

ग्वालियर मध्य प्रदेश सरकारी स्कूल में शिक्षा का स्तर अच्छा होता है या प्राइवेट स्कूल में? यह प्रश्न सुनकर आप हंस भी सकते हैं बाल भी खींच सकते हैं और इस खबर को बेवजह मान कर छोड़ भी सकते हैं। लेकिन याद कीजिए सीएम राइज स्कूल क्यों खोले गए सीएम राइज? स्कूल खोलने से पहले तत्काल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क्या दावे किए थे? उनका कहना था कि निजी स्कूल से बेहतर शिक्षा सरकारी स्कूल में मिलेगी। संसाधन भी बेहतर होंगे लेकिन अभी जो आंकड़े सामने निकलकर आए हैं वह चौंकाने वाले हैं। क्योंकि आज भी ज्यादातर माता पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजना ही पसंद कर रहे हैं।उनका भरोसा सरकारी स्कूल पर नहीं है और सरकार द्वारा किए गए दावों पर तो कतई नहीं है।

सबसे पहले आंकड़ों से समझें कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण बेहतर शिक्षा और संसाधन देने के दावों की पोल यह आंकड़े किस तरह खोल रहे हैं। शैक्षणिक वर्ष दो हजार पच्चीस छब्बीस में ग्वालियर जिले के समस्त स्कूलों में पहली से हायर सेकेंडरी में 4 लाख 61 हजार 466 छात्रों का नामांकन हुआ है। इनमें से केंद्रीय विद्यालय में 10398 छात्र का नामांकन हुआ है। नवोदय विद्यालय में 445 छात्र का नामांकन हुआ है। राज्य सरकार के सरकारी स्कूलों में 135227 छात्र का नामांकन हुआ है। राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्कूल में 3350 छात्र का नामांकन हुआ है जबकि ग्वालियर के समस्त प्राइवेट स्कूल में 322510 छात्र का नामांकन हुआ है। आंकड़े साफ बता रहे हैं कि निजी स्कूल में लगभग दुगने छात्रों का नामांकन हुआ है।

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