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राष्ट्रीय किसान दिवस 2025 देश के अन्नदाताओं के नाम शिवराज सिंह चौहान का संदेश, कहा- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप है ‘किसान’

भारत में हर साल 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस (Kisan Diwas) मनाया जाता है। यह दिन देश के किसानों को समर्पित है, जिन्हें भारतीय संस्कृति में ‘अन्नदाता’ कहा जाता है। राष्ट्रीय किसान दिवस भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर मनाया जाता है। जिन्हें ‘किसानों का मसीहा’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ग्रामीण भारत, खेती और किसानों के अधिकारों के लिए काम किया। इस खास अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने देश के किसानों के नाम संदेश जारी किया और किसान दिवस की शुभकामनाएं दी।

ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप ‘किसान’

शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने किसान और कृषि पद्धतियों के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है- ‘अन्न ही ब्रह्म’ है। लेकिन अन्न पैदा करने वाला किसान वास्तव में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का स्वरूप है। किसान केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और जनता के लिए अन्न उपजाता है। धूप, बरसात और ठंड सहकर वह खेतों में पसीना बहाता है, तब जाकर जीवनदायी अन्न का दाना पैदा होता है।

कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भर बना भारत

उन्होंने कहा कि अन्न ही हमें जीवन देता है। किसान का श्रम, त्याग और तपस्या ही देश की खाद्य सुरक्षा की नींव है। उसका योगदान केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। एक समय था जब देश को गेहूं तक आयात करना पड़ता था, लेकिन आज अन्न के भंडार भरे हुए हैं। वर्ष 2014 से 2024 के बीच अनाज उत्पादन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। फल, सब्जी और दूध जैसे कृषि उत्पादों में भी आज देश आत्मनिर्भर बन चुका है।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मिला आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा- शिवराज सिंह

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिला है। ICAR द्वारा विकसित उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती और तकनीक के उपयोग ने उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश में जोत का आकार छोटा होने के कारण किसानों को केवल अनाज या फल-सब्जी तक सीमित न रहकर इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनानी होगी। पशुपालन, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन जैसे कार्यों को खेती के साथ जोड़कर आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है।

प्राकृतिक खेती पर दिया जोर

आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को उपजाऊ बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती की ओर धीरे-धीरे बढ़ना जरूरी है। केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड के संतुलित उपयोग पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। दलहन और तिलहन में अभी आयात पर निर्भरता बनी हुई है। इसे समाप्त कर देश को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना एक बड़ा लक्ष्य है।

भगवान की पूजा के समान है किसानों की सेवा- केंद्रीय कृषि मंत्री

किसान भाइयों और बहनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि कृषि मंत्री के रूप में किसानों की सेवा भगवान की पूजा के समान है। पूरी मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा के साथ किसानों की सेवा जारी रहेगी, क्योंकि यही सच्ची राष्ट्र सेवा है।

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