गजनवी ने सोमनाथ शिवलिंग के टुकड़े मस्जिद में लगवाए 6 टन सोना लूटा; नेहरू मंदिर बनवाने के इतने खिलाफ क्यों थे
6 जनवरी 1026 यानी आज से करीब 1 हजार साल पहले। कश्मीर, मथुरा और ग्वालियर में लूटपाट कर चुका महमूद गजनवी भारत पर अपने आखिरी हमले के लिए सोमनाथ पहुंचा। उसके साथ 30 हजार घुड़सवार और हजारों पैदल सैनिक थे। सोमनाथ के ब्राह्मणों ने कहा, ‘शक्तिशाली सोमेश्वर ने भारत के देवताओं के अपमान का बदला लेने इन मुसलमानों को अपने पास बुलाया है।’
15 दिन तक मारकाट और लूटपाट के बाद गजनवी वापस लौटा तो उसके पास 6 टन से ज्यादा सोना था और पीछे सोमनाथ में 50 हजार से ज्यादा लाशें और खंडहर बन चुका मंदिर। गजनवी के बाद भी सोमनाथ मंदिर कई बार तोड़ा गया और फिर बना। आखिरी बार 75 साल पहले इसे सरदार पटेल के प्रयासों से बनाया गया।
इन्हीं दो ऐतिहासिक पड़ावों को जोड़ते हुए ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया गया, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी भी पहुंचे। उन्होंने अपने भाषण में कहा सोमनाथ मंदिर पर ध्वजा आज भी फहरा रही, 1000 साल पहले हमलावरों को लगा था कि वे जीत गए।
गजनवी की लूट के 1000 साल और मौजूदा सोमनाथ मंदिर के बनने के 75 साल पूरे होने पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया गया। 8 से 11 जनवरी तक चले इस कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया।
10 जनवरी की शाम वे सोमनाथ पहुंचे। उन्होंने सोमेश्वर महादेव की महाआरती की। 72 घंटे चलने वाले ओंकार जाप में शामिल हुए। फिर ड्रोन शो भी देखा, जिसमें 3 हजार ड्रोन से सोमनाथ गाथा दिखाई गई।
अगले दिन यानी 11 जनवरी को निकाली गई शौर्य यात्रा में पीएम मोदी शामिल हुए। इसमें 108 घोड़े और हजारों श्रद्धालु भी चल रहे थे। फिर पीएम मोदी ने सोमेश्वर महादेव का पूजन-अभिषेक किया।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, ‘1000 साल पहले 1026 में गजनवी ने मंदिर को तोड़ा था। उसे लगा उसने सोमनाथ का वजूद मिटा दिया। लेकिन इसके बाद ही मंदिर का पुननिर्माण शुरू हो गया।’
उन्होंने नेहरू का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा, ‘जब सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी मंदिर आने से रोकने की कोशिश की गई।’
पीएम मोदी ने कहा कि कोई भी देश कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं करेगा, लेकिन देश के कुछ लोगों ने कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेक दिए। कार्यक्रम खत्म होने के बाद पीएम मोदी राजकोट रवाना हो गए।
