Thu. Jan 15th, 2026

पुलिसवाली के चक्कर में बीवी-बच्चों का मर्डर करके गाड़ा; दोस्त को मार खुद की मौत दिखाई, 4 साल बाद खुलासा

साल 2012, अलीगढ़ का नौगवां गांव। दोपहर का वक्त। यूपी पुलिस से रिटायर्ड बनवारीलाल के घर कुछ अलग हलचल थी। बड़ा बेटा राकेश आंगन में बैठा किसी काम में लगा था।

तभी बाहर वाले कमरे से पिता की आवाज आई- “राकेश… अंदर आओ। घर के सब लोग बैठे हैं।”

राकेश उठा और कमरे में चला गया। मां, पिता, छोटा भाई राजीव और दो-चार रिश्तेदार पहले से बैठे थे। माहौल में अजीब सी औपचारिकता थी। बनवारीलाल ने बिना किसी भूमिका के सीधे कहा-

“तुम्हारी शादी तय कर दी है। लड़की घरेलू है, संस्कारी है। लोग एटा के रहने वाले हैं।”

सभी खुश थे, लेकिन राकेश ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। मां ने पूछा- “कोई परेशानी तो नहीं है तुम्हें?”

राकेश फिर भी चुप रहा। उसने नजरें झुका लीं, फिर अचानक उठकर बाहर चला गया। कुछ देर बाद छोटा भाई राजीव उसके पीछे गया। उसने राकेश के कंधे पर हाथ रखकर पूछा- “क्या हुआ?”

राकेश ने गहरी सांस ली और कहा- “तू जानता है, मैं रूबी को चाहता हूं। उसी से शादी करूंगा।”

राजीव वापस कमरे में गया और पूरी बात बता दी। बनवारीलाल का चेहरा तमतमा उठा। वो गुस्से में खड़े हुए, लेकिन कुछ बोले नहीं। उस रात घर में चुप्पी पसरी रही। अगले दिन दोपहर में पूरा परिवार खाने बैठा। बनवारीलाल ने थाली रखते हुए कहा-

“अब बताओ, उस लड़की में ऐसा क्या है जिसे तुम पसंद करते करते हो और एटा वाली लड़की में क्या कमी है?”

राकेश ने पिता की बात सुनी, लेकिन कुछ बोला नहीं। बनवारीलाल ने बात आगे बढ़ाई-

“शादी सिर्फ दो लोग नहीं मिलते, दो परिवार जुड़ते हैं। खानदान देखा जाता है। कुंडली मिलती है। दहेज भी मिलता है। तुम्हारी पसंद की लड़की दहेज दे पाएगी?”

राकेश ने धीमी आवाज में कहा- “वो पढ़ी-लिखी है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही है।”

पिता ने तंज कसा- “हमारे पास पैसों की कमी है क्या? नौकरी से घर नहीं चलता। घर चलाने के लिए घरेलू लड़की जरूरी होती है।”

कुछ दिन परिवार में ये तकरार चलती रही। आखिरकार राकेश ने घरवालों के दबाव में एटा की रत्नेश से शादी कर ली। शादी धूमधाम से हुई, लेकिन राकेश का मन कहीं और था। रत्नेश ससुराल आई तो उसने एक अनमना पति पाया।

बाहर से राकेश सामान्य दिखता था, लेकिन उसका मन किसी और से जुड़ा हुआ था। शादी के बाद भी वो चोरी-छिपे रूबी से मिलता रहा। घरवालों को भी इसका अंदाजा था, लेकिन किसी ने खुलकर कुछ नहीं कहा।

2015-16 आते-आते हालात और उलझ गए। उसी साल रूबी का सिलेक्शन उत्तर प्रदेश पुलिस में हो गया। वो कॉन्स्टेबल बनकर आगरा में तैनात हो गई। इन तीन-चार सालों में रत्नेश दो बार मां बन चुकी थी। पहले बेटा, फिर 2016 में बेटी हुआ।

बच्चे होने के बाद भी राकेश नहीं बदला, लेकिन रूबी को ये बात अंदर ही अंदर खटकने लगी। उसे लगने लगा कि राकेश अब उससे दूर हो जाएगा। वो उस पर दबाव बनाने लगी। फोन पर कहती-

“तुम्हारी शादी हो गई, बच्चे भी हो गए। तुम आखिर चाहते क्या हो? मैं क्या तुम्हारी रखैल हूं?”

राकेश चुप रह जाता। राकेश के चुप्पी साध लेने से रूबी और तमतमा जाती। राकेश ग्रेटर नोएडा की एक पैथोलॉजी में काम करता था। वहीं, चिपियाना बुजुर्ग इलाके में उसका खुद का घर था।

दो बच्चे होने के बाद भी जब रूबी और राकेश का मिलना-जुलना बंद नहीं हुआ, तो पिता बनवारीलाल पूरा परिवार लेकर वहीं आकर रहने लगे। इसके बाद से हालात खतरनाक मोड़ लेने लगे।

पत्नी रत्नेश को राकेश पर शक होने लगा। एक दिन उसने राकेश से सीधे पूछ लिया-

“कौन है वो लड़की? क्या छुपा रहे हो मुझसे?”

पहले तो राकेश टालता रहा। जब सवाल बढ़ते गए, तो उसका गुस्सा फूट पड़ा। उसने रत्नेश पर हाथ उठा दिया। ये सब कुछ बच्चों के सामने हुआ।

वो रोते हुए बोली- “ये मेरा कसूर है कि मैंने तुम्हारे लिए सब छोड़ दिया?”

राकेश बोला- “मैंने तुम्हें कभी पत्नी माना ही नहीं। मेरी शादी जबरदस्ती हुई थी। पापा ने मुझे मजबूर किया था।”

रत्नेश ने पूछा- “क्या ये बच्चे भी तुम्हारे पापा के हैं?”

बात हद से ज्यादा बढ़ चुकी थी। घरवालों ने किसी तरह दोनों को समझाकर मामला शांत करा दिया। फिर भी रिश्तों में दरार आ ही चुकी थी। पत्नी रत्नेश के सवाल, बात-बात पर उसके ताने राकेश को चुभने लगा था।

घर में रोज-रोज के झगड़ों ने उसे परेशान कर दिया था। उधर रूबी का दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा था।

एक शाम रूबी ने सीधे पूछा- “साफ-साफ बताओ, तुम मेरे साथ रहना चाहते हो या नहीं?”

राकेश कुछ पल चुप रहा, फिर बोला- “हां… सबसे ज्यादा अगर किसी के साथ रहना चाहता हूं, तो तुम्हारे साथ।”

रूबी ने कहा- “सबसे ज्यादा… ये कैसे साबित करोगे?”

राकेश थकी आवाज में बोला- “अगर कोई पैमाना हो, कोई मीटर हो जिससे नापा जा सके कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं, तो बता दो।”

रूबी की आवाज और ठंडी हो गई। कुछ देर रुककर बोली- “प्यार बातों से नहीं, एक्शन से साबित होता है।”

राकेश चौंका- “कैसा एक्शन…?”

रूबी ने सीधे कहा- “हमारे रास्ते से रुकावट हटा दो। अपनी पत्नी, अपने बच्चे… सब। तभी हम साथ रह सकते हैं।”

ये सुनकर राकेश जैसे पत्थर हो गया। उसने तुरंत फोन काट दिया। उस रात वो सो नहीं पाया। बार-बार बच्चों के चेहरे आंखों के सामने आते रहे। वो खुद से कहता रहा कि ये मुमकिन नहीं है। रूबी ने ये सिर्फ गुस्से में कहा होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed