MP में 1 मार्च से नया नियम, शस्त्र लाइसेंस के लिए अब सिर्फ ऑनलाइन आवेदन
अगर आप मध्य प्रदेश में बंदूक या अन्य हथियार लेने की सोच रहे हैं, तो अब पहले से ज्यादा सतर्क हो जाइए। 1 मार्च से शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया पूरी तरह बदलने जा रही है। अब पुराने तरीके से कागज भरकर दफ्तर में जमा करने की सुविधा खत्म हो जाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि शस्त्र लाइसेंस के लिए अब केवल ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। इसका मतलब है कि बिना ऑनलाइन आवेदन के न तो नया लाइसेंस मिलेगा और न ही कोई ऑफलाइन फॉर्म मान्य होगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से पूरी शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी।
एमपी शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया में क्या हुआ बड़ा बदलाव?
मध्य प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का फैसला कई शिकायतों और अनियमितताओं के बाद लिया गया है। पिछले कुछ समय में अलग-अलग जिलों से लाइसेंस जारी करने और कारतूस वितरण में गड़बड़ी की खबरें सामने आई थीं।
इन्हीं मामलों को देखते हुए अब सरकार ने पूरी शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। 1 मार्च के बाद नया लाइसेंस, नवीनीकरण या स्पोर्ट्स कोटे के तहत आवेदन सब कुछ ऑनलाइन ही होगा।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह है कि हर आवेदक का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज हो और उसे आसानी से ट्रैक किया जा सके। अब किसी भी तरह की सिफारिश या कागजी हेराफेरी की गुंजाइश बहुत कम हो जाएगी।
कैसे करें ऑनलाइन शस्त्र लाइसेंस आवेदन?
नए नियमों के अनुसार आवेदक को भारत सरकार के अधिकृत पोर्टल पर जाकर शस्त्र लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करते समय सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
जब आवेदन पूरा हो जाएगा, तो सिस्टम एक यूनिक फाइल नंबर जारी करेगा। इसी नंबर के जरिए आवेदक अपने आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकेगा। जरूरत पड़ने पर उसी नंबर के आधार पर आवेदन का प्रिंटआउट निकालकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा किया जा सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन आवेदन नहीं करता है और सीधे ऑफलाइन फॉर्म जमा करता है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। 1 मार्च के बाद केवल ऑनलाइन शस्त्र लाइसेंस आवेदन ही मान्य होंगे।
क्यों जरूरी हुआ शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को ऑनलाइन करना?
पिछले वर्षों में कई जिलों से यह शिकायत आई थी कि लाइसेंस जारी करने में नियमों का ठीक से पालन नहीं हो रहा। कुछ मामलों में गलत लोगों को भी लाइसेंस मिलने की बात सामने आई। कारतूस वितरण में भी गड़बड़ी की खबरें आई थीं।
ऐसी स्थिति में सरकार ने शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लिया। अब हर आवेदन का रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा। पुलिस सत्यापन, दस्तावेज जांच और अनुमोदन की प्रक्रिया भी सिस्टम में दर्ज होगी। इससे नियम तोड़ने वालों को आसानी से पहचाना जा सकेगा। साथ ही प्रशासन का नियंत्रण मजबूत होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
पूरी प्रक्रिया होगी पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य
नई ऑनलाइन शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया में आवेदन का हर चरण रिकॉर्ड होगा। आवेदन कब जमा हुआ, पुलिस सत्यापन कब हुआ, किस अधिकारी ने फाइल देखी यह सब सिस्टम में दर्ज रहेगा।
इससे न सिर्फ नए लाइसेंस बल्कि नवीनीकरण और स्पोर्ट्स कोटे के तहत जारी लाइसेंस की भी निगरानी आसान होगी। पहले जहां फाइलों को ढूंढने में समय लगता था, अब डिजिटल सिस्टम से सब कुछ तुरंत उपलब्ध रहेगा। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को सुरक्षित, भरोसेमंद और तेज बनाएगी।
