नींद की कमी का मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है प्रभाव, आज ही लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव
अपनी बातों को सही ढंग से किसी के साथ शेयर ना कर पाने, पारिवारिक जिम्मेदारी, ऑफिस का काम करते-करते इंसान इस कद्र थक जाता है कि वह दिमागी तौर पर धीरे-धीरे बीमार होने लगता है। ऐसे में उन्हें खालीपन और अकेलापन का भी सामना करना पड़ता है, जिस कारण वह अक्सर डिप्रेशन, एंजायटी या फिर स्ट्रेस जैसी मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स के शिकार होते चले जाते हैं। जिनका समय पर इलाज नहीं हो पाया, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसकी मुख्य वजह बदलती हुई लाइफस्टाइल लोगों में सोशल कनेक्टिविटी कम होना, दिनभर काम में उलझे रहना, खुद के लिए वक्त ना निकल पाना, आदि सहित अन्य कई कारक शामिल है। तो चलिए आज के आर्टिकल में हम आपको मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के कुछ आसान से ट्रिक बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप भी अपनी मानसिक सेहत को तंदुरुस्त बना सकते हैं।
जैसा की हम सभी जानते हैं कि नींद की कमी का मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में तनाव के हॉर्मोन, जैसे कि कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। यह शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे चिंता बढ़ सकती है। साथ ही ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होने लगती है। नींद की कमी से मूड स्विंग भी होता है, जिस कारण व्यक्ति चिड़चिड़ा, उदास या अधिक भावुक हो जाता है। इसकी मुख्य वजहों में देर रात तक जगते हुए मोबाइल फोन चलावा भी हो सकता है जोकि सीधे नींद पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
अपनाएं ये टिप्स
- सोने का एक नियमित समय बनाएं।
- हर रात 7-9 घंटे की नींद अवश्य लें।
- सोने से पहले कैफीन, भारी भोजन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग कम करें।
- नियमित व्यायाम करें, इससे मेटाबोलिज्म बढ़ेगा।
- सोने से पहले किताब पढ़ना या हल्की स्ट्रेचिंग करें।
- सोने से पहले ध्यान, योग करें या गहरी सांस लें।
अधिकांश वयस्कों को हर रात 7-9 घंटे की नींद की जरूरत होती है तो वहीं, उम्र के आधार पर बच्चों को 9-14 घंटे की नींद की जरूरत होती है, जबकि किशोरों को लगभग 8-10 घंटे की नींद की जरूरत होती है।
