जरूरत की खबर- ठंड में क्यों बढ़ते निमोनिया के केसेज 8 पॉइंट्स में समझें, बचाव के लिए 11 सावधानियां जरूरी, बता रहे हैं डॉक्टर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, सर्दियों के मौसम में निमोनिया के 30% से ज्यादा केसेज सामने आते हैं। ठंडी हवा, तापमान में कमी और कमजोर इम्यूनिटी इस संक्रमण को तेजी से फैलाते हैं। बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग इसके चपेट में जल्दी आते हैं क्योंकि उनका शरीर संक्रमण से लड़ने में कमजोर होता है।
नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट (NIH) की रिपोर्ट भी बताती है कि सर्दियों में वायरल संक्रमण गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। साधारण सर्दी और खांसी कई बार निमोनिया का रूप ले सकती है। हालांकि सही जानकारी, समय पर पहचान और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर हम निमोनिया से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम बात करेंगे कि सर्दियों में निमोनिया का रिस्क क्यों बढ़ता है। साथ ही जानेंगे कि-
- निमोनिया क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?
- इससे बचने के क्या उपाय हैं?
एक्सपर्ट: डॉ. शुभम शर्मा, कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- निमोनिया क्या है?
जवाब- निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक गंभीर संक्रमण है, जो लंग्स की हवा भरी थैलियों (alveoli) में सूजन पैदा करता है। इस सूजन के कारण इन थैलियों में पस (मवाद) या फ्लुइड भर जाता है, जिससे खांसी, बुखार, ठंड लगना और सांस फूलने जैसी समस्याएं होती हैं। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है और जानलेवा भी साबित हो सकता है।
जवाब- पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शुभम शर्मा बताते हैं कि सर्दियों में ठंडी और सूखी हवा के कारण रेस्पिरेटरी सिस्टम की म्यूकस मेम्ब्रेन कमजोर हो जाती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से हमला करते हैं।
म्यूकस मेम्ब्रेन रेस्पिरेटरी सिस्टम की अंदरूनी सतह पर मौजूद एक पतली लेयर होती है, जो धूल, कीटाणु और ठंडी हवा से फेफड़ों की रक्षा करती है। सर्दियों में जब हवा ठंडी और सूखी होती है तो यह लेयर सूख जाती है और संक्रमण का रिस्क बढ़ जाता है। सर्दियों में निमोनिया का रिस्क बढ़ने के और भी कई कारण हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-
