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ग्रह बदलने के लिए बना दिया नवग्रह मंदिर

मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल के सबसे ताकतवर मंत्री रहे डॉ नरोत्तम मिश्रा के ग्रह ऐसे उलटे हुए कि वे पिछला विधानसभा चुनाव हार गए. देश की सबसे बडी अदालत पेड न्यूज के मामले में  जिस विधानसभा से मिश्रा जी को बाहर नहीं कर पायी थी उसी विधानसभा के दरवाजे ग्रहों की दशा ने बंद कर दिए. दुखी मंत्री ने हार मानने के बजाय नवग्रहों को ही वश में करने की ठानी और अपने ग्रह नगर डबरा में एशिया का सबसे बड़ा और अद्भुत नवग्रह मंदिर बना  दिया है।इस नवग्रह के साथ उनकी पत्नियां भी विराजमान हैं।
डबरा में डॉ नरोत्तम मिश्रा चाहते तो वर्षों से बंद पडे शक्कर कारखाने को पुनर्जीवित कर इलाके के हजारों गन्ना उत्पादक किसानों का भला कर सकते थे लेकिन उन्हे किसानों की नहीं अपनी फिक्र थी सो 12 एकड़ जमीन पर सिर्फ मंदिर बना दिया. क्योंकि ग्रह उनके अनुकूल नहीं चल रहे हैं. मंदिर के लिए  जमीन और पैसे की उनके पास न पहले कमी थी और न आज है. कोई पैसों के बारे में सवाल करने की हिम्मत भी नही करता. धर्म के मामले में ऐसे सवाल धर्मविरोधी माने जाते हैं.. मंदिर का संचालन एक न्यास करेगा, जो मिश्रा जी का अपना .यह मंदिर सनातन धर्म परंपरा, वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र आधार पर 108 खंभों पर स्थापित किया है। ।
मंदिर में नवग्रह की स्थापना बहुत अध्ययन के बाद की गई है। हर मंदिर और ग्रह को ऐसे स्थान दिया है कि कभी वह एक-दूसरे के सामने न आ सके। सूर्य मंदिर की स्थापना के साथ उनके तेज को नियंत्रित करने पानी का तालाब, नालियां व झरोखे बनाए गए हैं।नवग्रह मंदिर बनने के बाद पर्यटन नक्शे पर ग्वालियर का डबरा उभरा आया है। ग्वालियर से ओरछा जाने वाले डबरा में नवग्रह मंदिर, दतिया पीतांबरा पीठ  और ओरछा बाद में जाएंगे, पहले डबरा में हाजरी लगाएंगे.जाएंगे। इसी हफ्ते मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा है।
नरोत्तम मिश्रा का सपना मप्र के मुख्यमंत्री बनने का था लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया की उसी जनता ने उन्हे ठुकरा दिया जिसने कभी उन्हे सिर माथे लिया था. डॉ नरोत्तम मिश्रा दतिया के लिए विकास के भगीरथ बन गए. नयी कलेक्ट्रोरेट, नया मेडिकल कालेज, नया हवाई अड्डा सब कुछ ले आए दतिया में लेकिन उनसे उनके ग्रह रूठे तो ऐसे रूठे कि अभी तक सीधे नहीं हुए हैं. पिछले दो साल से मिश्रा जी खाली बैठे हैं. संगठन लिफ्ट नहीं दे रहा, सरकार की कृपाकोर नहीं है. ऐसे में उन्होने राजनीतिक कोशिशों के साथ ही नवग्रहों को भी शांत करने का श्रीगणेश किया और नया नवग्रह मंदिर बना डाला.
अब इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही मिश्रा जी अपनी खोयी हुई प्रतिष्ठा अर्जित करने के लिए प्राण प्रतिष्ठा समारोह के नाम पर एक मेगा ईवेंट कर रहे हैं. उन्होने सत्तारूढ दल के साथ ही दीगर दलों के नेताओं, बाबाओं, कथा वाचकों और अलग अलग क्षेत्रों के ब्रांड ऐबेसडरों को डबरा आमंत्रित किया है. धर्म का और ग्रहों का मामला है सो मना लेना तय है. प्रशासन एक पांव पर खडा होकर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों में जुटा है.
उम्मीद की जाना चाहिए कि जिस तरह ताजमहल ने शाहजहाँ को अमर कर दिया वैसे ही ये नवग्रह मंदिर भी डबरा और डबरा के डॉ नरोत्तम मिश्रा को अजर, अमर बना देगा. उनके ग्रह फिरेंगे या नहीं ये मै नहीं कह सकता, लेकिन फिरें तो अच्छी बात है. वैसे इस मंदिर के बारे में डॉ नरोत्तम के अग्रज डॉ. श्रीमन नारायण मिश्रा कहते फिर रहे हैं कि2010 में मेरी माता जी की इच्छानुसार इसी परिसर में महालक्ष्मी मंदिर स्थापित किया था। इसके बाद छोटे भाई डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने नवग्रह मंदिर स्थापित करने का निर्णय लिया। कुछ वर्ष पूर्व नासा के वैज्ञानिक भी यहां आकर मंदिर देख चुके हैं। वे भी हैरान रह गए। मंदिर में नवग्रहों को पत्नियों के साथ स्थापित करने का विचार प्रसिद्ध संत दाती महाराज ने दिया था।
आगामी  11 से 20 फरवरी तक प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस दौरान 11 से 13 फरवरी तक पं. प्रदीप मिश्रा की कथा होगी। 14 से 16 फरवरी तक कवि कुमार विश्वास का कार्यक्रम होगा। 17 से 19 फरवरी तक बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा होगी।20 फरवरी को नवग्रह पीठ पर एक भंडारे के साथ महोत्सव का समापन होगा। मंदिर परिसर में 9 मंजिला यज्ञशाला भी बनाई है। जहां प्रतिदिन एक लाख आहुतियां दी जाएंगी. आप भी यदि अपने ग्रह सीधे करना चाहते हों तो इस समारोह में शामिल हो सकते हैं.

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