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ISRO को मिली बड़ी सफलता, चंद्रयान-4 के लिए चांद पर तलाशी सेफ लैंडिंग की जगह, 2028 तक लॉन्च करने का लक्ष्य

नई दिल्ली  भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक बड़ी प्रगति हुई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने अब तक के सबसे जटिल और महत्वाकांक्षी मिशन, चंद्रयान-4, के लिए चंद्रमा पर लैंडिंग की जगह तय कर ली है। यह मिशन सिर्फ चांद पर उतरने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसका लक्ष्य चंद्रमा की सतह से नमूने (सैंपल) इकट्ठा कर उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। इस सफलता के साथ भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

लैंडिंग स्थल के चयन के लिए कई तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखा गया, जिनमें शामिल हैं:

  • सतह का ढलान 10 डिग्री से कम होना चाहिए।
  • उस क्षेत्र में बड़े चट्टान या बोल्डर न के बराबर हों।
  • लैंडिंग साइट पर कम से कम 11-12 दिनों तक लगातार सूरज की रोशनी उपलब्ध हो।
  • गड्ढों (क्रेटर्स) की संख्या न्यूनतम हो।
  • पृथ्वी के साथ सीधा रेडियो संचार स्थापित करना आसान हो।

इन सभी मानदंडों पर खरा उतरने के बाद ही इस जगह को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

क्या है चंद्रयान-4 मिशन और यह क्यों है खास?

चंद्रयान-4 भारत का पहला लूनर सैंपल रिटर्न मिशन है, जिसे 2028 तक लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मिशन कई चरणों में पूरा होगा और इसमें पांच अलग-अलग मॉड्यूल शामिल होंगे: प्रोपल्शन मॉड्यूल, डिसेंडर (लैंडर), एसेंडर, ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल।

इसरो के वैज्ञानिकों ने यह महत्वपूर्ण पहचान चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से मिली तस्वीरों के गहन विश्लेषण के बाद की है। चुनी गई जगह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में स्थित मोंस माउटन पर्वत के पास है। फिलहाल इसे लैंडिंग के लिए सबसे सुरक्षित और उपयुक्त स्थान माना जा रहा है।

इस मिशन की सफलता न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को साबित करेगी, बल्कि चंद्रमा की उत्पत्ति और संरचना से जुड़े कई रहस्यों से भी पर्दा उठाएगी। अब इस प्रस्तावित लैंडिंग साइट को अंतिम मंजूरी के लिए लैंडिंग सेलेक्शन कमेटी के पास भेजा जाएगा, जिसकी स्वीकृति के बाद यह भारत के ऐतिहासिक मिशन का लॉन्चपैड बन जाएगी।

 

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