Fri. Feb 13th, 2026

भारत की सबसे बड़ी रक्षा डील, फ्रांस से खरीदे जाएंगे नए 114 राफेल लड़ाकू विमान, मोदी सरकार ने प्रस्ताव पर लगाई मुहर

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होने जा रही है। गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में स्वीकृत इस सौदे की कुल कीमत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक बनाता है। यह फैसला फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अगले हफ्ते होने वाले भारत दौरे से ठीक पहले आया है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और प्रगाढ़ होने की उम्मीद है।

यह सौदा पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत होगा, जिसके अंतर्गत इन फ्रांसीसी विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस सौदे के तहत राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट (Dassault) भारत की किसी स्वदेशी कंपनी के साथ मिलकर एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेगी। भारत में बनने वाले इन विमानों में करीब 60 प्रतिशत उपकरण और हथियार स्वदेशी होंगे।

डील पर अंतिम फैसला बाकी

रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने पिछले महीने ही इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी, जो किसी भी रक्षा सौदे की प्रक्रिया का पहला कदम होता है। डीएसी की मंजूरी के बाद अब यह प्रस्ताव वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के पास जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, 17 से 19 फरवरी के बीच राष्ट्रपति मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान इस G2G (गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट) डील पर अंतिम फैसला हो सकता है।

यह भी संभावना है कि तत्काल जरूरतों को देखते हुए 114 विमानों में से शुरुआती 16 राफेल सीधे फ्रांस से खरीदे जा सकते हैं, जबकि बाकी का निर्माण भारत में होगा। इन 114 लड़ाकू विमानों से वायुसेना की 5 से 6 नई स्क्वाड्रन खड़ी की जा सकती हैं, जिससे घटती स्क्वाड्रन की संख्या की चुनौती से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राफेल ने साबित की थी क्षमता

वायुसेना लंबे समय से अपनी लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त राफेल विमानों की मांग कर रही थी। हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के खिलाफ राफेल की सफलताओं ने इस मांग को और पुख्ता कर दिया। वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने राफेल को ‘ऑपरेशन सिंदूर का हीरो’ बताते हुए वायुसेना में इनकी संख्या बढ़ाने की उम्मीद जताई थी।

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने फ्रांस से राफेल विमान खरीदे हैं। साल 2016 में भारत ने 59 हजार करोड़ रुपये में 36 राफेल विमानों का सौदा किया था। इसके अलावा, पिछले साल नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के लिए राफेल के मरीन वर्जन (राफेल-एम) खरीदने का भी करार हुआ था। इस नए सौदे के बाद, पुराने एमआरएफए (मीडियम वेट फाइटर जेट) प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है, जिसमें कई विदेशी कंपनियां शामिल थीं। यह नई डील सीधे भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed