लखनऊ अग्निकांड- कपल की शादी होने वाली थी एनिमेशन आर्टिस्ट की भूखे पेट मौत, जान गंवाने वाले युवाओं की कहानी
लखनऊ अग्निकांड में मरने वाले 15 युवाओं में अनामिका और नीलेश भी थे। दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे। इनकी शादी होने वाली थी। अनामिका पश्चिम बंगाल में न्यू अलीपुर और नीलेश लखनऊ के रहने वाले थे। दोनों हेड हॉपर एनिमेशन कंपनी में जॉब करते थे।
अनामिका के पिता नीलेश के घर रिश्ता लेकर 3 बार आ चुके थे। मंगलवार को अनामिका के पिता विश्वनाथ सामंता मेडिकल कॉलेज (KGMU) के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। उनका रो रोकर बुरा हाल था। बेटी की लाश देखकर यही कह रहे थे-
अनामिका की मां बार-बार बेहोश हो रही थीं। विश्वनाथ अपने आंसुओं को छिपाते हुए उन्हें संभालते रहे। भाई का कहना है कि हादसे से कुछ देर पहले बहन से बातचीत हुई थी। वहीं, हादसे में मरने वाले सौमल्य की दिसंबर में शादी होनी थी। अनुछा सोमवार का व्रत थीं। ज्योति परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कम उम्र में ही जॉब कर रही थीं।
अनामिका के पिता बोले- शादी की बातचीत कर रहे थे
अनामिका के पिता विश्वनाथ ने कहा- शादी को लेकर बातचीत चल रही थी। नीलेश के यहां हम 2-3 बार जा चुके हैं। उसके मां और पिता से भी मिले थे। दोनों में अफेयर का पता नहीं, लेकिन एकसाथ ऑफिस में काम कर रहे थे। हमारी इच्छा थी कि उनकी शादी कराई जाए।
सुबह फोन पर बात हुई, दोपहर में मौत हो गई
अनामिका के भाई आकाश ने बताया- हमारे माता-पिता एक हफ्ते पहले ही बहन से मिलने आए थे। सुबह उससे फोन पर बात हुई थी। उसने कहा था- मैं अब जॉब पर जा रही हूं। उसके बाद दोपहर में मौत हो गई। वह एनिमेशन आर्टिस्ट थी। तीन साल से यहां जॉब कर रही थी। इससे पहले, चंडीगढ़ में थी। 7 साल का एक्सपीरियंस था।
नीलेश के परिजन बोले- पोस्टमॉर्टम हाउस से फोन आया, तब हादसे का पता चला
नीलेश (28) लखनऊ के हजरतगंज के रहने वाले थे। उनके पिता शत्रुघ्न लाल यूपी बिजली विभाग से रिटायर्ड हैं। नीलेश चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। परिवार ने बताया कि हादसे के बारे में सोमवार शाम पोस्टमॉर्टम हाउस से फोन आने पर जानकारी मिली।
हालांकि, उन्होंने इमारत में आग लगने की खबरें देखी थीं, लेकिन यह पता नहीं था कि उनके बेटे की भी इस घटना में मौत हो गई है। परिजनों ने बताया कि वे नीलेश के रिश्ते की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही हादसा हो गया।
भाई की दिसंबर में शादी होनी थी, उसी की तैयारी में था
सौमल्य की डेडबॉडी लेने पश्चिम बंगाल से उनके चचेरे भाई शुभम आए थे। उन्होंने कहा- सौमल्य पहले अहमदाबाद में काम करता था। 2-3 साल पहले यहां काम करने आया। इतना कहते ही वह रोने लगे। उन्होंने कहा- रात में 1 बजे खबर मिली। हमको पुलिस का फोन आया कि सौमल्य की मौत हो गई है। सौमल्य की इसी साल दिसंबर में शादी होने वाली थी। उसी की तैयारियों में वह लगा था।
सोमवार को व्रत रहती थी अनुछा, बिना कुछ खाए ऑफिस गई
हादसे में जान गंवाने वाली अनुछा राय मोहनलालगंज के धोधनखेड़ा की रहने वाली थीं। छोटी बहन ईशा राय ने बताया- सोमवार सुबह बड़ी बहन अनुछा से उनकी आखिरी बार बात हुई थी। अनुछा सोमवार को व्रत रहती थीं, इसलिए वे सुबह जल्दी उठकर पूजा करती थीं। ईशा ने बताया कि घर से व्रत के लिए फल और साबूदाने से बनी चीजें ले जाने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने उस दिन कुछ खाने की इच्छा नहीं जताई थी।
बहन की दोस्त ने फोन कर बताया- ऑफिस में आग लगी
ईशा ने बताया कि अनुछा सुबह जल्दी काम पर चली जाती थीं और शाम को लौटती थीं, इसलिए दोनों की बातचीत अक्सर सुबह या शाम को ही हो पाती थी। सोमवार शाम छह बजे बहन की दोस्त वर्षा का फोन आया। उन्होंने पूछा कि अनुछा कहां हैं? इस पर ईशा ने बताया कि वह अभी दफ्तर में होंगी, क्योंकि उनकी ड्यूटी अक्सर शाम सात से साढ़े सात बजे तक रहती थी।
कुछ देर बाद वर्षा ने दोबारा फोन कर बताया कि ऑफिस में आग लग गई है। यह सुनकर ईशा ने अनुछा के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की। दूसरी बार कॉल उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए कहा कि अनुछा का मोबाइल उनके पास है। उन्हें तत्काल ट्रॉमा सेंटर पहुंचना चाहिए, क्योंकि आग बेहद भीषण थी।
घर का खर्च चलाने के लिए कमाने लगी बेटी
हादसे में जान गंवाने वाली चिनहट की ज्योति का बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार में पिता हरिचरण कश्यप और मां कुसुम हैं। ज्योति के चार भाई हैं। पिता की कमता में मिठाई की दुकान है। ज्योति ने इसी साल नौकरी जॉइन की थी। वे जूनियर कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर काम करती थीं।
