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यमकेश्वर मागथा निवासी सुरेन्द्र कुकरेती बने यूकेडी के कार्यकारी अध्यक्ष

यमकेश्वर के मूल निवासी एवं हाल निवासी सुरेन्द्र कुकरेती को यूकेडी का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। बताते चलें कि सुरेन्द्र कुकरेती यूकेडी के के गठन के बाद प्रारम्भिक सदस्यों में से एक हैं। मैकेनिकल इंजीनियंरिग की नौकरी छोड़कर 1982 में यूकेडी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। राज्य आन्दोलन में यूकेड़ी की तरफ से झंडा बुलंद कर राज्य आदोंलन में सशक्त भूमिका निभायी। सुरेन्द्र कुकेरती ने बताया कि हमने उत्तर प्रदेश से अलग राज्य की मॉग की थी और जिस राज्य को नई दिशा और दशा देने का सपना देखा था वह आज भी अधूरा ही है। पहा़ड़ी राज्य की स्थापना कर यहॉ के लोगों को रोजगार, यहॉ की प्रकृति संपदा का उचित दोहन और छोटे छोटे लघु उद्योगों के माध्यम से राज्य को आत्म निर्भर बनाने का जो उद्देश्य था वह आज अधूरा ही रह गया।

यूकेडी कार्यकारी सुरेन्द्र कुकरेती का कहना है कि राज्य बनने के बाद जहॉ पलायन कम होना था, लेकिन नतीजा इसका उल्टा रहा, राष्ट्रीय पार्टियों के पास राज्य के लिए स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों से लगभग 25 लाख से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग दो हजार से अधिक स्कूलों पर ताला लग चुका है, स्वास्थ्य विभाग पहाड़ों पर चढने से पहले ही हॉफ रहा है। यूकेड़ी ने जिस राज्य के लिए लड़ाई लड़ी और उसमें सफलता भी हासिल करी लेकिन जिस पहाड़ के लिए संघर्ष किया उसकी दुर्गति होगी कभी ऐसा सोचा नहीं था। आज पहाड़ की बोली भाषा, संस्कृति लुप्त होने के कगार पर है, इसके लिए औपनिवेशिक पार्टियों ने कभी ध्या नही नहीं दिया नीतियां क्या बनाते। बड़े बड़े डाम बनाकर पहाड़ उजाड़ दिये गये हैं, जबकि यहॉ बड़े डाम की बजाय छोटे छोटे पनघट बनाकर बिजली उत्पादन करके आत्म निर्भर बनाया जाना था, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

सुरेन्द्र कुकरेती का कहना है कि राज्य बनने के बाद पहले परिसीमन में राज्य की विधानसभा सीटें कम हुई वहीं 2026 के परिसीमन मेंं पहाड़ की और 09 सीटें और घटने का अनुमान है। जबकि पहाड़ की सीटों को जनसंख्या नहीं बल्कि भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बनायी जानी चाहिए। हिमांचल और उत्तरी पूर्वी भारत में भी क्षेत्रफल के आधार पर ही परिसीमन किया गया है। राज्य बनने के बाद बेरोजगारों की तादाद में 10 गुनी वृद्धि हुई, मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पहाडों से पलायन हो चुका है, ऐसे में राज्य को बनाया है तो उसें सवांरने के लिए प्रतिब़द्ध हर एक नवयुवक को होना होगा ।

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