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अब सिंगल विंडो सिस्टम पर करना होगा टावर लगाने का आवेदन

रुद्रपुर। शासन ने प्रदेश में बेसिक टेलीफोन और मोबाइल टावर को लेकर प्रावधानों में बदलाव किया है। अब भवनों और भूखंडों पर टावर लगाने के लिए विकास प्राधिकरण में आवेदन और 50,000 रुपये अनुज्ञा शुल्क नहीं देना होगा। आवेदक को सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम पर आवेदन करना होगा और इसके लिए 10,000 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क ही जमा करना होगा। शासन के आवास अनुभाग की ओर से जारी संशोधित अधिसूचना को विकास प्राधिकरणाें ने बोर्ड बैठक में स्वीकृत कराकर लागू कर दिया है।
घरों की छतों पर टेलीकाम कंपनियों के टावर लगाने के लिए कई प्रावधान रखे गए थे। जिनमें टावर का निर्माण संकरी गलियों में अनुमन्य नहीं था। मैदानी क्षेत्रों में पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 9 मीटर रखी गई थी। सेवा आपरेट कंपनी को टावर निर्माण से आसपास होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति वहन करने का शपथ पत्र देना होता था। विकास प्राधिकरण के दायरे में नहीं आने वाले मैदानी क्षेत्रों में आवेदन के साथ अनुज्ञा शुल्क 10,000 रुपये और पर्वतीय क्षेत्र में 5,000 रुपये निर्धारित था लेकिन शासन ने भवन निर्माण एवं विकास (संशोधन) उपविधि/ विनियम 2023 में कई प्रावधानों को हटा दिया है। नए प्रावधानों में टावर के लिए 10,000 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क के साथ भवन का स्वीकृत मानचित्र, अधिकृत स्ट्रक्चर इंजीनियर की ओर से जारी प्रमाण पत्र के साथ सिंगल विंडो सिस्टम या गति शक्ति संचार पोर्टल पर आवेदन करना होगा। आवेदन के सात दिन के भीतर यदि प्राधिकरण को मानचित्र या प्रमाण पत्र पर आपत्ति होगी तो पोर्टल पर दर्ज कराई जाएगी। सात दिन के बाद आपत्ति निराधार मानी जाएगी। नए प्रावधान में आवश्यकतानुसार राज्य या भारत सरकार के किसी विभाग से एनओसी लेने का दायित्व आवेदक का होगा। टावर संबंधी शिकायत का निस्तारण आरओडब्ल्यू पालिसी के तहत होगा।

भवन या भूखंड पर टावर लगाने के लिए शासन की ओर से संशोधित प्रावधानों को बोर्ड बैठक में स्वीकृत कराकर लागू कर दिया गया है। अब आवेदक को सिंगल विडो सिस्टम में आवेदन करना होगा और आवेदन शुल्क भी कम कर दिया गया है। हरीश कांडपाल, उपाध्यक्ष, डीडीए

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