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बेमौसमी धान का विकल्प मक्का अपनाने पर मिलेगा अनुदान

रुद्रपुर। धान के कटोरे के रूप में जाने वाले जिले में कृषि विभाग किसानों को बेमौसमी धान का मोह छोड़ मक्के की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इसके तहत किसानों को बीज और शस्य क्रियाओं के लिए अनुदान दिया जा रहा है। जिले में गिरते भूजल की बड़ी वजह बेमौसमी धान की खेती मानी जाती है। दरअसल तराई में किसान मौसमी और ग्रीष्मकालीन (बेमाैसमी) धान की खेती करते आ रहे हैं। बेमौसमी धान की खेती में मुनाफा अधिक होने की वजह से किसान दिलचस्पी लेते हैं लेकिन इसमें पानी अधिक इस्तेमाल होने से कीटों का जीवन चक्र पर बड़ा असर पड़ता है। धान की फसल को बचाने के लिए अधिक कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है। जिला प्रशासन ने घटते भूजल को देखते हुए वर्ष 2019 में बेमौसमी धान की खेती के बजाय किसानों को मक्के की खेती का विकल्प सुझाया था। किसानों ने हाथों हाथ लेते हुए मक्के की खेती की थी, लेकिन दाम सही नहीं मिलने से किसानों ने विकल्प को अपनाने से इनकार कर दिया था।
तराई किसान संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने कहा कि जिला प्रशासन एमएसपी पर मक्के की खरीद की गारंटी कंपनियों से कराकर दे। वर्ष 2020 में 500 से 600 रुपये क्विंटल मक्का बिका था। किसान मक्का सुखाने में परेशान होता है जबकि कंपनियों के पास ड्रायर होते हैं। अगर किसान को एमएसपी पर खरीद की गारंटी मिले तो वह मक्के की खेती करेगा। जिले में जलाशयाें के नीचे कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां धान के अलावा दूसरी खेती नहीं हो सकती है।

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