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मुखिया न होने से सुस्त पड़ा सदस्यता अभियान, प्रदेश में कांग्रेस के सामने सांग‍ठनिक इकाइयों के चुनाव की है चुनौती

देहरादून: प्रदेश में कांग्रेस संगठन का मुखिया नहीं होने का प्रभाव पार्टी के सदस्यता अभियान पर पड़ रहा है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के सदमे के कारण पार्टी के दिग्गज नेताओं से लेकर आम कार्यकत्र्ता इस अभियान में शिद्दत से जुड़ नहीं पा रहे हैं। सांगठनिक चुनाव को गति देने को कांग्रेस नेतृत्व को नए अध्यक्ष की तैनाती को लेकर जल्द निर्णय लेना पड़ सकता है।

उत्तराखंड में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद बीती 15 मार्च से रिक्त चल रहा है। मुखिया नहीं होने से प्रदेश कार्यकारिणी भी बेअसर बनी हुई है। पूरे देश में प्रदेशवार कांग्रेस के सांगठनिक चुनाव होने हैं। इसका पूरा दारोमदार सदस्यता अभियान पर है। विधानसभा चुनाव में पराजय ने प्रदेश में कांग्रेस के सांगठनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। इसे गति देने को बीते दिनों अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) की ओर से प्रदेश में सहायक निर्वाचन अधिकारी मनोज भारद्वाज को भेजा गया था। भारद्वाज के सामने भी वक्ता वर्तमान में सांगठनिक शिथिलता का मुद्दा उठा चुके हैं

ब्लाक अध्यक्षों का होना है चुनाव

प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने के लिए सदस्यता अभियान की अंतिम तिथि 31 मार्च को चालू माह अप्रैल के लिए बढ़ाया गया है। इस माह के पहले हफ्ते यानी सात अप्रैल तक बूथ स्तर पर सक्रिय सदस्य चुने जाएंगे। बूथ स्तर पर क्रियाशील सदस्यों से 95 ब्लाक अध्यक्ष और फिर 26 सांगठनिक जिलों की इकाइयों और जिलाध्यक्षों को चुनाव होगा। प्रत्येक संगठनात्मक ब्लाक से एक पीसीसी सदस्य चुना जाएगा। साथ ही एआइसीसी सदस्य चुने जाएंगे। इसके बाद विधिवत प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा। फिर चुने हुए प्रतिनिधि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में हिस्सा लेंगे। यह पूरी प्रक्रिया आगामी अगस्त माह तक पूरी होगी।

पार्टी के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती बूथ स्तर पर क्रियाशील सदस्यों के माध्यम से विभिन्न सांगठनिक इकाइयों के गठन की है। प्रदेश अध्यक्ष न होने से सदस्यता अभियान से लेकर सांगठनिक चुनाव की निगरानी नहीं हो पा रही है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश प्रभारी और सहायक प्रदेश निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से यह मामला पार्टी नेतृत्व तक पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर इसी हफ्ते के भीतर निर्णय कर सकती है। अध्यक्ष के साथ नेता प्रतिपक्ष एवं उपनेता प्रतिपक्ष पर भी निर्णय सामने आ सकता है।

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