इसी उद्देश्यों को लेकर एम्स ऋषिकेश के आपातकालीन चिकित्सा विभाग और ट्राॅमा सर्जरी विभाग की ओर से उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फाॅर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूकोस्ट) व कार्डियो डायबिटिक सोसाइटी के सहयोग से चिकित्सकों और तकनीशियनों के लिए एडवांस्ड कैडवर बेस्ड इमरजेंसी स्किल पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा पद्धति गंभीर व तीव्र बीमारी या दुर्घटना के कारण चोट लगने वाले रोगियों के तत्काल स्वास्थ्य मूल्यांकन, निदान, पुनर्जीवन और उपचार के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है। इमरजेंसी विभाग में कार्यरत प्रत्येक हेल्थ केयर वर्कर को इस चिकित्सा पद्धति का अनुभव होना जरूरी है।
कार्यशाला में ट्राॅमा इमरजेंसी विभागाध्यक्ष डाॅ. कमर आजम, इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. निधि कैले, ट्राॅमा सर्जन डाॅ. मधुर उनियाल, डाॅ. रविकांत, डाॅ. वरुण कुमार, डाॅ. रजनीश अरोड़ा, डाॅ. बिजेंद्र सिंह, एम्स दिल्ली के डाॅ. संजीव भोये, निम्स हैदराबाद के डाॅ. आशिमा शर्मा, एम्स भुवनेश्वर के डाॅ. उपेंद्र हंसदा, एम्स गोरखपुर की डाॅ. अंकिता कावी और हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट के डाॅ. रोहन भाटिया सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हुए।