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हल्द्वानी के अक्षत ने नीट में पाए शत-प्रतिशत अंक, अब इस सपने को करना चाहते हैं साकार

 देहरादून। उत्तराखंड के युवाओं ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में खुद को साबित कर दिखाया है। हल्द्वानी निवसी अक्षत पंगरिया ने पहले प्रयास में शत प्रतिशत यानी 720 में से 720 अंक अर्जित किए हैं। देश में 67 छात्र-छात्राओं को इस बार शत प्रतिशत अंक मिले हैं, जिनमें अक्षत भी शामिल हैं। अक्षत मूल रूप से चंपावत जिले के पातल गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता डा. जीबी पंगरिया किच्छा के अस्पताल में चिकित्सक, जबकि मां सोनू पंगरिया गृहणी हैं। आकाश इंस्टीट्यूट के छात्र अक्षत ने बताया कि वह डाक्टर बन पहाड़ के अस्पतालों में सेवा देना चाहते हैं। अक्षत की प्रारंभिक शिक्षा आर्यमान विक्रम बिड़ला स्कूल से हुई। 12वीं में उन्होंने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनकी बड़ी बहन आकांक्षा पीएचडी की तैयारी कर रही हैं। अक्षत ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, स्वजन और गुरुजनों को दिया है। अक्षत का कहना है कि वह रोजाना 5-6 घंटे पढ़ते थे। स्कूल के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी उनकी नजर रहती थी। इसके अलावा उन्होंने मोबाइल से दूरी बनाए रखी, जिससे वह पढ़ाई पर फोकस कर पाए मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। दून के मोथरोवाला की रहने वाली वाटिका रावत ने इन पंक्तियों को नीट में चरितार्थ कर दिखाया है। उनका यह चौथा प्रयास था। पहले तीन प्रयास में परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। पर असफलताएं उन्हें डिगा नहीं सकीं, इस बार वह परीक्षा में 710 अंक प्राप्त कर नीट की देहरादून टापर बनी हैं। वाटिका के पिता हयात सिंह रावत व मां त्रिलोत्मा रावत सरकारी शिक्षक हैं। उन्हीं के विश्वास और सहयोग ने वाटिका को असफलताओं के दौर से निकलने में मदद की। उन्होंने वर्ष 2021 में बलूनी पब्लिक स्कूल से 97 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 2021 में पहली बार नीट दिया। पर सिर्फ 230 अंक प्राप्त किए। वर्ष 2022 में उन्हें 360 व वर्ष 2023 में 530 अंक मिले, पर मंजिल अभी दूर थी। इस बार जी जान से मेहनत की और 710 अंक प्राप्त किए।

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