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कूनो में लौट रहा है जंगल का रोमांच! आज से शुरू दूसरा फॉरेस्ट रिट्रीट

श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) का नाम पिछले दो वर्षों में कई बार सुर्खियों में रहा है, क्योंकि यहीं से भारत में चीता परियोजना की नई कहानी शुरू हुई थी। अब कूनो फिर से चर्चा में है, और वजह है फॉरेस्ट रिट्रीट फेस्ट का दूसरा सीजन, जो 14 नवंबर से शुरू हो रहा है। इस बार का आयोजन न सिर्फ बड़ा है, बल्कि पहले से ज्यादा रोमांचक भी है। जंगल की खुली हवा, पेड़ों की खुशबू और कूनो की बेजोड़ जैव विविधता ये सब मिलकर इसे एक अनोखा अनुभव बनाने वाले हैं।

पिछली बार कई पर्यटकों की निराशा इस बात को लेकर थी कि उन्हें चीते नहीं दिखाई दिए। लेकिन इस बार कूनो प्रबंधन ने पूरा जोर इस बात पर लगाया है कि जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को चीतों का प्राकृतिक रहवास देखने का अधिक अवसर मिले। टेंट सिटी दोबारा तैयार की गई है, एडवेंचर गतिविधियों को और विस्तारित किया गया है, और खास बात चीता इंटरप्रिटेशन सेंटर अब पर्यटकों को चीता संरक्षण की पूरी कहानी बताएगा। कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट 2.0 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने का एक संपूर्ण अनुभव बनने जा रहा है।

1. शानदार टेंट सिटी

फॉरेस्ट रिट्रीट 2.0 का सबसे बड़ा आकर्षण है टेंट सिटी, जिसमें कुल 25 शानदार टेंट हाउस बनाए गए हैं। यह टेंट सामान्य कैंप की तरह नहीं, बल्कि लग्जरी सुविधा वाले ग्लैंपिंग यूनिट्स हैं, ताकि पर्यटक जंगल के बीच भी आराम और सुरक्षा महसूस कर सकें। हर टेंट में आधुनिक सुविधाएँ हैं, लाइटिंग से लेकर फर्निशिंग तक, और इस तरह व्यवस्थित हैं कि पर्यटकों को जंगल के बीच रहने का असली एहसास मिले।

पिछली बार टेंट सिटी काफी पसंद की गई थी, इसलिए इस बार बुकिंग को डिजिटल और ऑफलाइन दोनों रूपों में खोला गया है। देश-विदेश के पर्यटक खासकर इस अनुभव के लिए कूनो की ओर रुख कर रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में 24 चीते हैं, जिनमें से 16 खुले जंगल में और 8 बड़े बाड़ों में रखे गए हैं। पिछले सीजन में सफारी के दौरान पर्यटकों को निराशा हुई थी क्योंकि चीते नजर नहीं आए थे। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए इस बार पार्क प्रबंधन ने कई सुधार किए हैं।

2. सफारी रूट और वाहन बढ़ाए गए

कूनो में सफारी के लिए फिलहाल 10 वाहन चलते थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाई जा रही है ताकि अधिक पर्यटक साफ-सुथरे तरीके से जंगल के भीतर जा सकें। सफारी रूट भी इस तरह से तय किया गया है कि चीतों के मूवमेंट ज़ोन को प्राथमिकता दी जा सके, लेकिन बिना उन्हें परेशान किए। प्रबंधन का लक्ष्य है कि इस बार पर्यटक चीतों की प्राकृतिक लाइफस्टाइल को करीब से देख सकें।

3. चीता इंटरप्रिटेशन सेंटर

इस बार रिट्रीट का बड़ा आकर्षण है, चीता इंटरप्रिटेशन सेंटर। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ पर्यटक चीतों के व्यवहार, उनके शिकार करने के तरीके, उनके संरक्षण की कहानी और भारत में उनकी वापसी के पूरे इतिहास के बारे में विस्तार से जान सकेंगे। इंटरप्रिटेशन सेंटर में डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो स्टोरीज, मॉडल्स और इंटरएक्टिव पैनल लगाए गए हैं। यह न सिर्फ पर्यटकों की जानकारी बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें चीता संरक्षण के महत्व को समझने में भी मदद करेगा। कूनो फॉरेस्ट रिट्रीट 2.0 सिर्फ वन्यजीव लवर्स के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो प्रकृति, संस्कृति और लोक अनुभव को साथ लेकर चलना पसंद करते हैं।

4. विलेज वॉक, नाइट वॉक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

रिट्रीट में पर्यटक आसपास के गाँवों की संस्कृति को करीब से अनुभव कर सकें, इसके लिए विलेज वॉक का आयोजन किया गया है। यहां पर्यटक स्थानीय लोगों की जीवनशैली, खानपान, कला और हस्तशिल्प को समझ सकते हैं। इसके साथ ही शाम को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्थानीय नृत्य और लोकगीत प्रस्तुत किए जाएंगे, जो कूनो क्षेत्र की असली झलक पेश करेंगे। नाइट वॉक इस आयोजन का रोमांचकारी हिस्सा है, जहाँ प्रशिक्षित टीम के साथ पर्यटक रात के जंगल का शांत और रहस्यमयी अनुभव लेते हैं, यह अनुभव लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। बर्ड वॉचिंग गतिविधियाँ भी इस बार बड़ा आकर्षण हैं, क्योंकि कूनो में 200 से अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

पर्यटकों के लिए नया आकर्षण

इस बार कूनो प्रबंधन ने बड़ा कदम उठाते हुए सोविनियर सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है। यह सेंटर पर्यटकों के लिए यादगार चीजें उपलब्ध कराएगा, टी-शर्ट, कैप, बैज, फोटो फ्रेम, चीता प्रिंटेड वस्तुएँ, लोकल हैंडीक्राफ्ट व अन्य सामान।

कूनो क्यों है इतना खास?

कूनो नेशनल पार्क न सिर्फ मध्य प्रदेश का, बल्कि पूरे भारत का एक अनूठा जंगल है। यह वही स्थान है जिसे कई साल पहले एशियाई शेरों के पुनर्वास के लिए चुना गया था। बाद में इसे चीता परियोजना का केंद्र बनाया गया। इसके जंगलों में वन्यजीवों की कई दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं, चीतल, सांभर, नीलगाय, भालू, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, 200 से ज्यादा पक्षी और कई सरीसृप। चीता प्रोजेक्ट कूनो को एक नई पहचान दे चुका है। यहाँ चीते अफ्रीका के जंगलों से आए थे, और अब यह प्रयास है कि उन्हें भारत की जलवायु और जंगलों में पूरी तरह अपनापन महसूस कराया जाए।

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