Sat. Apr 18th, 2026

मालव्य राजयोग से 3 राशियों का भाग्योदय, बढ़ेगा कारोबार, नौकरी में प्रमोशन, धनलाभ के प्रबल योग

ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों, कुंडली और नक्षत्रों का बड़ा महत्व माना जाता है। हर एक ग्रह एक निश्चित समय अवधि के बाद राशि परिवर्तन करता है, जिससे योग राजयोग का निर्माण होता है।ज्योतिष में शुक्र को दैत्यों का गुरू माना जाता है, वे हर माह चाल बदलते है । शुक्र वृषभ व तुला राशि के स्वामी है। वे कन्या राशि में नीच और मीन में उच्च का माने जाते है। वर्तमान में प्रेम, सौंदर्य और सुख के कारक शुक्र अपनी स्वामी राशि तुला में विराजमान है। साल 2026 में 2 मार्च को दैत्यों के गुरू शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में प्रवेश करेंगे जिससे मालव्य राजयोग बनेगा, जिसका प्रभाव 26 मार्च तक बना रहेगा। इसके बाद शुक्र मेष राशि में प्रवेश करेंगे। यह राजयोग 3 राशियों के लिए बेहद लकी साबित होने वाला है।आईए जानते है कौन कौन सी है वो लकी राशियां………..

मीन राशि पर प्रभाव  मालव्य राजयोग जातकों के लिए शुभ सिद्ध हो सकता है। आपके व्यक्तित्व में निखार देखने को मिलेगा।हर काम में सफलता मिलेगी । आय में वृद्धि हो सकती है, नए नए स्त्रोत खुल सकते है। शादीशुदा लोगों का दांपत्य जीवन खुशहाल रहेगा। अविवाहितों के लिए विवाह के प्रस्ताव आ सकते है। मान-सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। आर्थिक स्थिति अच्‍छी और मजबूत होगी ।परिवार का साथ मिलेगा।

धनु राशि पर प्रभाव  मालव्य राजयोग जातकों के लिए लकी साबित हो सकता है। भौतिक सुखों की प्राप्ति हो सकती है। इस अवधि में कोई वाहन या प्रापर्टी खरीद सकते हैं। परिवार और भाग्य का साथ मिलेगा। निवेश से लाभ पा सकते हैं। होटल, प्रापर्टी , रियल स्टेट से जुड़े व्यापारियों को अच्छा लाभ हो सकता है। लंबे समय से अटके और रूके हुए कामों को गति मिल सकती है।

मिथुन राशि पर प्रभाव  मालव्य राजयोग जातकों के लिए बेहद लकी साबित हो सकता है। नौकरीपेशा को नए नए अवसर मिल सकते है।व्यापार और पार्टनरशिप में काम करने वालों को लाभ मिल सकता है। आत्मविश्वास के साथ मान- सम्मान में वृद्धि हो सकती है। विवाहितों का वैवाहिक जीवन खुशनुमा रहेगा। परिवार व जीवनसाथी के साथ रिश्ते और मधुर होंगे। लव अचानक धन लाभ मिल सकता है। इस अवधि में यात्रा के प्रबल योग है। पिता के साथ संबंध पहले से मजबूत होंगे।

कुंडली में कब बनता है मालव्य

मालव्य राजयोग शुक्र से संबंधित है, जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र लग्न से अथवा चन्द्रमा से केन्द्र के घरों में स्थित है अर्थात शुक्र यदि कुंडली में लग्न अथवा चन्द्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में वृष, तुला अथवा मीन राशि में स्थित है तो कुंडली में मालव्य राजयोग बनता है। अगर शुक्र ग्रह पर सूर्य या गुरु की दृष्टि पड़ रही है तो इस राजयोग का फल व्यक्ति को कम प्रदान होगा। क्योंकि सूर्य और गुरु का शुक्र के साथ शत्रुता का भाव है।

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