Sat. Apr 18th, 2026

गुजरात विधानसभा में 7 घंटे की बहस के बाद UCC बिल पास, जानिए शादी, तलाक और लिव-इन पर क्या हैं नए नियम

उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को लंबी और हंगामेदार बहस के बाद ‘गुजरात समान नागरिक संहिता 2026’ विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा सुबह सदन में पेश किए गए इस बिल पर 7 घंटे से भी ज्यादा समय तक चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगे।

इस कानून के लागू होने के बाद गुजरात में विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों पर एक समान नियम लागू होंगे। यह कानून न केवल राज्य के भीतर रहने वाले लोगों पर, बल्कि राज्य के बाहर रह रहे गुजरातियों पर भी प्रभावी होगा। हालांकि, संविधान के तहत पारंपरिक अधिकारों से संरक्षित अनुसूचित जनजातियों (ST) और कुछ अन्य समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

विवाह और लिव-इन पर क्या हैं नए प्रावधान?

यह विधेयक बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लगाता है। इसके तहत, कोई भी व्यक्ति अपने जीवनसाथी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी नहीं कर सकता। शादी तभी वैध मानी जाएगी जब दोनों पक्षों में से किसी का कोई जीवित जीवनसाथी न हो।

इसके अलावा, बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को इसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। साथ ही, इसे खत्म करने के लिए भी एक औपचारिक प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे रिश्तों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे समानता और राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 और 44 का हवाला देते हुए कहा कि यह कानून सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करेगा।

वहीं, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस ने इसे जल्दबाजी में लाया गया और ‘मुस्लिम-विरोधी’ करार दिया। विपक्षी दलों ने मांग की कि इसे विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए ताकि इस पर और गहन विचार-विमर्श हो सके।

कांग्रेस विधायक अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि यह बिल मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा, “आप सदन में बहुमत की मदद से लोगों के अधिकारों को छीनना चाहते हैं।” विधायक शैलेश परमार ने इसे 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम बताया।

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