SIR पर सुप्रीम कोर्ट का आज आ सकता है बड़ा फैसला, क्या चुनाव आयोग के पास है SIR कराने का अधिकार
देश की चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट की पारदर्शिता से जुड़े अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट आज बड़ा फैसला सुनाने जा रहा है। दरअसल मामला चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ा है। कांग्रेस, RJD, TMC समेत कई विपक्षी दलों और नेताओं ने इस प्रक्रिया को चुनौती दी है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग जिस तरीके से SIR कर रहा है, वह संविधान और कानून की सीमाओं से बाहर हो सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि आयोग के पास इस तरह की प्रक्रिया चलाने का अधिकार है या नहीं।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट की बेंच में CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल हैं। कोर्ट यह देखेगा कि क्या संविधान के अनुच्छेद 326, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियम चुनाव आयोग को मौजूदा तरीके से SIR कराने की अनुमति देते हैं। खास बात यह है कि कोर्ट ने पहले इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसकी वजह से कई राज्यों में यह अभियान जारी रहा। बिहार, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में यह प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है।
जानिए क्या है SIR और क्यों हो रहा है इसका विरोध
जानकारी दे दें कि SIR यानी Special Intensive Revision एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए चुनाव आयोग वोटर लिस्ट की गहन जांच करता है। इसका मकसद फर्जी वोटरों के नाम हटाना, मृत मतदाताओं का रिकॉर्ड अपडेट करना और डुप्लीकेट एंट्री खत्म करना बताया जाता है। चुनाव आयोग का कहना है कि इससे वोटर लिस्ट ज्यादा पारदर्शी और सटीक बनेगी। लेकिन विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
दरअसल याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि SIR के नाम पर कई असली मतदाताओं के नाम भी हटाए जा सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित होंगे। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), योगेंद्र यादव, महुआ मोइत्रा, मनोज झा, केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इनका कहना है कि इतनी बड़ी प्रक्रिया के लिए साफ कानूनी ढांचा जरूरी है। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अपडेट रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है और SIR उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में आधार कार्ड को भी SIR के दस्तावेजों में शामिल करने का निर्देश दिया था। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। आयोग को आधार का सत्यापन कराने की छूट भी दी गई थी। इस फैसले के बाद मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया, क्योंकि इससे नागरिकता और मतदान अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई।
कई राज्यों में जारी है अभियान, फैसले का दूर तक पड़ेगा असर
दरअसल चुनाव आयोग फिलहाल देशभर में चरणबद्ध तरीके से SIR अभियान चला रहा है। 14 मई को आयोग ने 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में इस प्रक्रिया को शुरू करने का ऐलान किया था। इनमें मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्य भी शामिल हैं। असम में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और वहां अंतिम वोटर लिस्ट जारी की जा चुकी है।
