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जगदीशपुर में 19 जुलाई को मोहन कैबिनेट बैठक, UCC विधेयक के ड्राफ्ट पर लगेगी मुहर, विधानसभा के मानसून सत्र में आएगा बिल

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में मोहन यादव सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। 14 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया है कि 19 जुलाई 2026 को भोपाल के जगदीशपुर (पुराना नाम इस्लाम नगर) में एक विशेष कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें UCC के मसौदे को आधिकारिक मंजूरी दी जाएगी।

इसके अलावा मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश किए जाने वाले अन्य विधेयकों और महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है।  20 जुलाई से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक को सदन में पेश होने की प्रबल संभावना है। यह विधेयक एक देश-एक विधान-एक प्रधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ​

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने पर विचार-विमर्श के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सोमवार (13 जुलाई 2026) को राज्य सरकार को सौंप दी है। आगामी विधानसभा सत्र में यूसीसी ड्रॉफ्ट को सदन के पटल पर लाया जाएगा। ड्रॉफ्ट पर चर्चा कर इसकी अच्छाई और सच्चाई को सबके सामने लाने का प्रयास रहेगा। यूसीसी के लिए उच्च स्तरीय समिति ने हिंदु, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी वर्ग के लोगों की राय ली है।

बता दें कि 20 जुलाई से मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र प्रारंभ होने जा रहा है। यह सत्र 24 जुलाई तक चलेगा, जिसमें 14 विधेयक आना है। यह मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का 11वां सत्र होगा।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) 3 खंड का फाइनल प्रतिवेदन 

  • UCC का मसौदा तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी थी। यह रिपोर्ट 3 खंडों में तैयार की गई है, जिसमें 4 भाग, 404 धाराएं (Sections) और 7 अनुसूचियां शामिल हैं।
  • पहले खंड में समिति की अनुशंसाओं का प्रतिवेदन है और इसमें समिति ने अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य के विभिन्न विधियों एवं प्रथाओं का विश्लेषण कर अपनी अनुशंसाएं प्रतिवेदित की है। इस खंड में 10 अध्याय है।
  • प्रतिवेदन का दूसरा खंड विधेयक के प्रारूप के रूप में है। समिति द्वारा प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप को मध्यप्रदेश में प्रचलित विधियों एवं नियमों के दृष्टिगत तैयार किया गया है।
  • समिति ने सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश यह की है कि मध्य प्रदेश की अनुसूचित जनजातियों को प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखा जाए, ताकि उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराएं प्रभावित न हों।
  • इस कानून को लेकर सरकार को जनता से 9.58 लाख से अधिक सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से अधिकांश ने इसका समर्थन किया है।
  • इस कानून के लागू होने से विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, विरासत, गोद लेने की प्रक्रिया और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के लिए सभी नागरिकों (एसटी को छोड़कर) पर एक समान नियम लागू होंगे।
  • राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों, जैसे विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण तथा लिव-इन संबंधों से संबंधित प्रचलित व्यवस्थाओं के अध्ययन करने का दायित्व सौंपा गया था।
  • समिति द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन राज्य शासन के विधि विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। विधेयक के परिमार्जन एवं वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया के बाद विधेयक मंत्रि-परिषद की स्वीकृत के बाद मानसून सत्र में ही विधानसभा में रखे जाने की संभावना है।

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