ग्वालियर में सड़कों की बदहाली…हाईकोर्ट की अफसरों को सख्त फटकार कहा-अपनी नाकामी का बोझ अदालत पर न डालें, ठेकेदारों को भुगतान से पहले काम जांचें
ग्वालियर की बदहाल सड़कों और बिगड़ी यातायात व्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर निगम अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश न करें। निगम द्वारा सड़क निर्माण और मरम्मत के अनुमानित खर्च की सूची पेश किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर फैसले के लिए हाईकोर्ट की आड़ लेना उचित नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गड्ढे कैसे भरने हैं, किस एजेंसी से काम कराना है और सड़क की मरम्मत कैसे करनी है, यह तय करना नगर निगम की जिम्मेदारी है। अदालत अधिकारियों की ढाल बनने के लिए नहीं है।
116 सड़कों पर पैचवर्क को मंजूरी
हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय वकीलों के कमीशन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने शहर की सड़कों की जांच शुरू कर दी है। विक्की फैक्ट्री से झांसी रोड, चेतकपुरी से सिंधिया महल गेट और एजी ऑफिस पुल तक नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV) से सड़कों की स्कैनिंग की गई।
निगम ने 127 स्थानों को पैचवर्क के लिए चिन्हित किया था। इनमें से 116 सड़कों पर मरम्मत की अनुमति दी गई है। हालांकि जिन सड़कों से गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल लिए जाने हैं, वहां फिलहाल पैचवर्क रोक दिया गया है।
सैंपल लेने से 30 मिनट पहले बताई जाएगी जगह
PWD की सेंट्रल टेस्टिंग लैब की टीम 3 और 6 सितंबर को सड़क और मिट्टी के सैंपल लेगी। जांच वाली जगहों के नाम सैंपलिंग से करीब 30 मिनट पहले ही बताए जाएंगे। इससे पहले स्थान गोपनीय रखे जाएंगे। सड़कों की मोटाई और निर्माण गुणवत्ता की जांच लैब में की जाएगी।
हजीरा से बिरलानगर और कालपी ब्रिज से सूर्य मंदिर सहित कुछ स्थानों पर सैंपल लिए जाने हैं। इसलिए इन जगहों पर फिलहाल मरम्मत नहीं की जाएगी।
पसंदीदा एजेंसी को काम देने पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्धारित एसओआर मानकों को दरकिनार कर निजी एजेंसी M/s ग्राम इंफ्राटेक को काम देने और गुणवत्ता मानकों में ढील की कोशिश पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे दुर्भावना से प्रेरित माना।
अदालत ने निर्देश दिए कि क्रॉस-वेरिफिकेशन और गुणवत्ता की पूरी जांच के बिना किसी ठेकेदार को भुगतान नहीं किया जाए। जांच पूरी होने तक एक रुपए का भुगतान भी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
NHAI की सड़कों के भी लिए जाएंगे सैंपल
हाईकोर्ट ने जांच आयोग को NHAI के अधीन आने वाली सड़कों के भी भौतिक सैंपल लेने की अनुमति दी है। इन सड़कों से संबंधित डेटा रिपोर्ट में देरी होने के कारण अब मौके से सीधे सैंपल लिए जाएंगे।
मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी। इस दौरान सड़क जांच की रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की जाएगी।
