नेपाल से 55km दूर तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप एक हफ्ते पहले बाढ़-भूस्खलन से तबाही मची थी; अब तक 1273 लोगों की मौत
नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर दूर तिब्बत में गुरुवार को 5 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था और इसकी गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे थी।
भूकंप जमीन की सतह से काफी कम गहराई पर आया। ऐसे भूकंप ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं, क्योंकि इनकी भूकंपीय ऊर्जा सतह तक जल्दी पहुंचती है और रास्ते में कम कमजोर होती है। हालांकि, फिलहाल भूकंप से किसी तरह के नुकसान या लोगों के घायल होने की खबर नहीं है।
यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब 26 अगस्त को तिब्बत और नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में अब तक कुल 1273 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें नेपाल में 1252 और तिब्बत में 21 लोगों की जान गई है।
शवों की पहचान के लिए DNA जांच की जा रही है, ये कैसे होती है और भारत इसमें क्या मदद कर रहा है, जानिए भास्कर नॉलेज में
सवाल नेपाल को भारत कैसे मदद कर रहा है?
जवाब भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भेजी है। यह टीम काठमांडू में नेपाल पुलिस और स्थानीय एक्सपर्ट्स के साथ काम कर रही है। टीम शवों से DNA सैंपल लेने, उनकी जांच और परिजन के DNA से मिलान में तकनीकी मदद कर रही है।
सवालः DNA जांच से पहचान कैसे होती है?
जवाबः DNA हमारे शरीर का ऐसा जेनेटिक कोड है, जो माता-पिता से मिलता है। जुड़वां बच्चों को छोड़ दें तो हर व्यक्ति का DNA अलग होता है। बुरी तरह क्षतिग्रस्त शवों की पहचान के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट्स हड्डी या दांत से DNA सैंपल लेते हैं और उसे लापता व्यक्ति के परिजन के DNA से मिलाते हैं। इससे पहचान की सबसे भरोसेमंद पुष्टि होती है।
सवालः DNA जांच में कितना समय लगता है?
जवाबः आमतौर पर DNA जांच में 1 से 3 सप्ताह लग सकते हैं। लेकिन आपदा के दौरान ज्यादा सैंपल होने से समय बढ़ सकता है। नई तकनीकों से कुछ मामलों में 24 से 72 घंटे में भी रिपोर्ट मिल सकती है।
तिब्बत में 100 नेपाली लापता, केरुंग में 1,500 लोग फंसे
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई बाढ़ के बाद तिब्बत में करीब 100 नेपाली नागरिक लापता हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि तिब्बत के केरुंग इलाके में करीब 1,500 नेपाली नागरिक फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने की तैयारी की जा रही है।
छेत्री ने यह भी बताया कि भारत में मिले कम से कम 19 शव नेपाल की भोटेकोशी नदी की बाढ़ में बहकर वहां पहुंचे थे। ये शव भोटेकोशी से त्रिशूली और नारायणी नदियों के रास्ते भारत पहुंचे।
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड ने सिर्फ वहां की सड़कें, बस्तियां और टूरिस्ट प्लेस को ही नहीं, बल्कि बिहार से जुड़े कारोबार और टूरिज्म की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है।
भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही से लेकर सीमावर्ती बाजारों, टूरिस्ट गाड़ियों और सामान से भरे ट्रकों तक पर इसका असर दिखाई दे रहा है।
मौत का आंकड़ा 1252 पहुंचा, 4875 लोग लापता
नेपाल में मौत का आंकड़ा बढ़कर 1252 हो गया है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं, जिसमें तिब्बत में जान गंवाने वाले 21 लोग भी शामिल हैं। जबकि करीब 4875 लोग अब भी लापता हैं।
सबसे ज्यादा 355 शव चितवन से बरामद हुए हैं। इसके अलावा नवलपरासी ईस्ट से 218, नवलपरासी वेस्ट से 208 और नुवाकोट से 177 शव मिले हैं। नवलपरासी वेस्ट में बरामद शवों में भारत से मिले और सौंपे गए 18 शव भी शामिल हैं।
नेपाल में बाढ़ के बाद AI पर सवाल उठे
नेपाल बाढ़ के बाद AI के बढ़ते इस्तेमाल और उसकी पर्यावरणीय कीमत को लेकर सवाल उठे हैं। नेपाल में डेटा सेंटर बनाने की चर्चा के बीच विशेषज्ञों ने AI के लिए जरूरी भारी बिजली-पानी की खपत और पर्यावरण पर उसके असर का आकलन करने की जरूरत बताई है।
डेटा सेंटर से निकलने वाली गर्मी और उनके लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली-पानी की मात्रा को लेकर चिंता जताई गई है। इसलिए नेपाल जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में इनके निर्माण से पहले पर्यावरणीय असर का अध्ययन जरूरी माना जा रहा है।
डेवलपमेंट एक्सपर्ट आशुतोष तिवारी ने सवाल उठाया कि AI और एजेंटिक AI का इस्तेमाल बाढ़ जैसी आपदाओं में रियल टाइम डेटा का विश्लेषण, खतरे की पहचान और रेस्क्यू में क्यों नहीं किया जा रहा।
भारत ने भेजी 5 टन से ज्यादा जरूरी दवाएं
भारत ने बाढ़ से प्रभावित नेपाल के लिए जरूरी दवाओं की पांचवीं खेप भेजी है। इसमें 5 टन से ज्यादा जरूरी दवाएं शामिल हैं।
भारत ने इसके साथ 11 सदस्यीय स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू टीम भी भेजी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, टीम के साथ 6 टन से ज्यादा रेस्क्यू उपकरण भी भेजे गए हैं।
PM शाह बोले- क्लाइमेट चेंज का मुद्दा उठाना जरूरी
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि इस आपदा का क्लाइमेट चेंज से संबंध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से उठाया जाना चाहिए।
पिछले हफ्ते आई बाढ़ में बड़ी संख्या में लोग लापता हुए हैं। इनके परिवार अब अपने परिजनों के नहीं मिलने की स्थिति में प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
