हार्ट में छेद की सर्जरी के लिए इंतजार-करते मौत,कमेटी बनाई एम्स के डॉक्टर्स के अनुसार- ऑपरेशन संभव नहीं था; छात्रा के पिता बोले- मामला दर्ज कराएंगे
कोटा के गुमानपुरा की छात्रा तन्वी (15) की मौत के मामले में एम्स में अब जांच समिति बनाई गई है। एम्स के मुताबिक- तन्वी को साल 2012 में पहली बार लाया गया था। इसके बाद पूरी तरीके से जांच के बाद साल 2017 में डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट की जटिल बनावट के कारण सर्जरी संभव नहीं है। परिवार को दवा के जरिए इलाज की सलाह दी गई थी।
बता दें कि तन्वी के दिल में छेद था। एम्स में सर्जरी के लिए परिवार 13 साल से इंतजार कर रहा था। परिवार का आरोप है कि इतने समय में 100 से भी ज्यादा बार तन्वी को लेकर एम्स पहुंचे थे, लेकिन हर बार सर्जरी की तारीख आगे बढ़ा दी गई। इसके बाद अब 1 सितंबर को तन्वी की एम्स में मौत हो गई थी।
पिता बोले- 2015 में सर्जरी की डेट तय थी, फिर टालते गए
तन्वी के पिता मुकेश ने बताया- अब मामले में एफआईआर दर्ज करवाएंगे। उन्होंने कहा- कोई भी समिति बना लो, उससे क्या होगा। जब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकलेगा और एक्शन नहीं लेंगे, तब तक कमेटी का क्या मतलब है। उन्होंने बताया- पहली बार 2 सितंबर 2015 को बच्ची के ऑपरेशन के लिए डेट तय कर दी गई थी, लेकिन इसके बाद दीपावली के लिए कहा। फिर कहा गया कि कंडयूट (कृत्रिम नली या ट्यूब) उपलब्ध नहीं हैं।
मुकेश ने बताया- डॉक्टर ने हमें किसी संजीव के नंबर दिए। संजीव को तीस हजार रुपए दिए, तब एम्स में कंडयूट पहुंचा। इसके बाद भी ऑपरेशन नहीं हुआ और इतने साल से लगातार टालमटोल करते गए। मुकेश ने कहा- हमने दिल्ली में पुलिस को भी कॉल किया था। पुलिस ने पोस्टमाॅर्टम करवा दिया।
2-3 महीने में जांच के लिए बुलाया था
घरवालों के मुताबिक- डॉक्टरों ने हर 2-3 महीने में जांच के लिए बुलाया था। परिवार हर बार इस उम्मीद में कोटा से दिल्ली जाता कि इस बार बेटी का ऑपरेशन हो जाएगा, लेकिन सर्जरी की तारीख ही मिलती रही।
तन्वी के पिता मुकेश रेडीमेड कपड़ों की शॉप पर काम करते हैं। तन्वी 9वीं कक्षा की छात्रा थी। तन्वी के पिता मुकेश ने बताया कि 2 साल की उम्र में दिल की बीमारी का पता चला था। उसी समय से दिल्ली एम्स में तन्वी का इलाज चल रहा था।
ऑक्सीजन लेवल 48 प्रतिशत रह गया था
एम्स के अनुसार- तन्वी पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी ओपीडी में लाई गई थीं। जांच में तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया नामक जटिल जन्मजात दिल की बीमारी का पता चला था।
एम्स के अनुसार- 1 सितंबर की सुबह करीब 2:50 बजे तन्वी को अचानक कमजोरी महसूस हुई। ऑक्सीजन लेवल 48 प्रतिशत रह गया। डॉक्टरों ने लंबे समय तक रिससिटेशन का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
मामले में एम्स ने जांच समिति बनाई है। एम्स के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. रीमा दादा ने बताया- कमेटी मरीज के इलाज, विशेषज्ञों की राय, मेडिकल रिकॉर्ड और मौत से जुड़ी परिस्थितियों की विस्तार से जांच करेगी। एम्स ने कहा- अंतिम निष्कर्ष पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और समिति की जांच पूरी होने के बाद ही निकाले जाएंगे।
दिल्ली एम्स में इलाज के लिए 13 साल से चक्कर काट रही कोटा के गुमानपुरा की 15 साल की छात्रा तन्वी की मौत हो गई। तन्वी 2 साल की उम्र से वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) यानी दिल में छेद की बीमारी से जूझ रही थी
