राजस्व रिकार्ड रूम में वर्षों से धूल खा रहे दस्तावेजों को कलेक्टर के निर्देश पर 350 कर्मचारियों ने 6 महीने तक खंगाला तब जबलपुर पहला जिला राजस्व रिकार्ड में हुआ डिजीटल
मध्यप्रदेश में जबलपुर को नेतृत्व विहीन जिला माना जाता था, लेकिन पिछले 10 वर्षों से राजनेताओं में जागरूकता आई है और जबलपुर अब बड़ा गांव के तमगे से निकलकर चारों दिशाओं में वायब्रेट जबलपुर के रूप में अपनी छवि को स्थापित करने में काफी लोकप्रिय हो गया है। लेकिन जबलपुर के बढ़ते कदम में वर्तमान जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना कलेक्टर संस्थान की भूमिका को विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने जबलपुर जिले की फीडबैक स्टोरी करने के लिए तमाम जनप्रनिधियों एवं आम जनता से जिला प्रशासन के बारे में जानकारियां एकत्रित करने की कोशिश की। इसी दौरान जब यह प्रतिनिधि कलेक्टर कार्यालय पहुंचा तो देखा कि कलेक्टर कार्यालय जबलपुर में कलेक्टर दीपक सक्सेना की कार्यशैली से जनता किस हद तक संतुष्ट है। यह लिखने में अतिश्योक्ति नहीं है कि कलेक्टर दीपक सक्सेना पहले ऐसे कलेक्टर होंगे, जिन्होंने कलेक्टर संस्थान की विश्वसनीयता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मिशन के अनुरूप कार्य करने में कई क्रांतिकारी निर्णय लिए हैं। बता दें कि, आज जब राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि ने कलेक्टर दीपक सक्सेना से एक संक्षिप्त मुलाकात में यह सवाल किया कि कलेक्टर संस्थान को जबलपुर में विश्वसनीय और जन उपयोगी बनाने की दिशा में आप क्या-क्या फैसले कर रहे हैं, तो इस सवाल के जवाब में कलेक्टर दीपक सक्सेना ने कहा कि हम सिर्फ कलेक्टर संस्थान की कार्यशैली को मप्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जनता के हित में प्रक्रियाओं को सरलीकृत करते हुए शत-प्रतिशत पारदर्शी बनाने का काम कर रहे हैं। उन्होंंने बताया कि निजी स्कूलों के द्वारा विद्यार्थियों से अनाप-शनाप वसूली पर जब रोक लगाई गई तो स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में हड़कंप मचा, शिक्षा माफियाओं ने प्रलोभनों के साथ घेराबंदी करने की कोशिशें की लेकिन कलेक्टर संस्थान नहीं रुका। दीपक सक्सेना ने बताया कि सैकड़ो निजी स्कूलों को कानून की परिधि में लाकर कड़े अनुशासन के साथ जो कार्यवाही की गई है उसका व्यापक असर हुआ और प्रधानमंत्री की अवधारणा के साथ कलेक्टर संस्थान ने आगे बढ़कर मप्र सरकार की सकारात्मक छवि भी बनाई। दीपक सक्सेना ने बताया कि इसी अवधारणा के चलते जबलपुर जिले के राजस्व रिकार्ड को डिजीटल करने में कलेक्टर संस्थान की प्रतिष्ठा को भी दाव पर लगा दिया और जिसका फायदा यह हुआ कि जबलपुर जिले का राजस्व रिकार्ड मप्र में सबसे पहले डिजीटल हो गया। अब कोई भी किसी भी गांव का व्यक्ति पोर्टल में खसरा नंबर डालकर, पटवारी हल्का नंबर डालकर अपनी जमीन की जानकारी डिजीटली प्राप्त कर सकता है और इन कामों में आरआई, पटवारी, तहसीलदार की टीम के द्वारा परेशान किए जाने वाले तथा भोले-भाले लोगों से वसूली किए जाने की परंपरा पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। कलेक्टर दीपक सक्सेना ने बताया कि वर्षों से धूल खा रहे दस्तावेजों को दीमक से बचाने के लिए उपयोग में लाए गए कीटनाशक दुर्गंध के बीच 350 कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लगातार 6 महीने तक दस्तावेजों को खंगाला और उन्हें पटवारी हल्का नंबर से लेकर ग्राम पंचायत तक एक ट्रांसपेरेंट बक्सों में सुरक्षित रखते हुए डिजीटल कर दिया गया है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल प्रतिनिधि को साथ लेकर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने राजस्व दस्तावेजों के लिए बनाए गए डिजीटल रूम का अवलोकन भी कराया। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि किसी भी कलेक्टर संस्थान का यह पहला क्रांतिकारी कदम है, जिससे राजस्व रिकार्ड के मामले में पारदर्शिता करने का यह अभियान पूरे देश में कलेक्टरों के लिए रोल मॉडल बन चुका है ऐसा माना जाए तो चौकिएगा मत…।
