Wed. Jun 3rd, 2026

पीएमओ को भेजी गई जल मिशन घोटाले की शिकायत से घबराया लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मंत्री संपतिया उइके को ओएसडी ने फंसा दिया, नरहरि ने किया बदनाम, किशोर समरीते की शिकायत पर जस का तस, जारी किए जांच करने के आदेश

मध्यप्रदेश में मंत्रियों को बदनाम करने के लिए उनका एक ओएसडी ही काफी है। भ्रष्टाचार करने के लिए ओएसडी मंत्री से गलत-शलत आदेश करवा लेता है, नोटशीट बनवा लेता है और फंस जाता है मंत्री। यह ताजा और चौंकाने वाला उदाहरण मध्यप्रदेश की आदिवासी महिला मंत्री संपतिया उईके के विभाग में उनके मंत्री बनने के बाद सबसे बड़े घोटाले के रूप में उजागर होने जा रहा है और इसे उजागर करने के लिए जिम्मेदार कोई और नहीं है, विभाग का प्रमुख सचिव ओवर स्मार्ट पी. नरहरि बताया जाता है। वाक्या यह है कि बालाघाट जिले के एक पूर्व विधायक किशोर समरीते जिनकी फितरत है सरकार किसी भी हो, लेकिन वे अपने समाजवादी गुणों को आधार बनाकर सीधे सरकार पर वार नहीं करते परंतु मंत्री और उस विभाग के नौकरशाह को टारगेट जरूर करते हैं। इसी के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लागू किए गए भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस फार्मूले की धज्जियां मंत्री के ओएसडी ने बेशरमों की तरह उड़ाई और मंत्री से अपने भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा को पार करते हुए उन्हें धोखे में रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा संकल्पित 30 हजार करोड़ की जल मिशन पर पलीता लगा दिया। इसी का फायदा उठाकर समरीते ने 12 अप्रैल 2025 को आदिवासी महिला मंत्री संपतिया उईके को टारगेट किया और प्रधानमंत्री मोदी को शिकायत भेजते हुए सीबीआई जांच की मांग कर डाली। समरीते का काम अपनी जगह सही हो सकता है। सूत्रों के अनुसार जब प्रधानमंत्री कार्यालय से उपरोक्त प्रकरण में पूछताछ की गई तब विभाग हड़बड़ाया, घबराया और इसी के चलते लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के प्रमुख सचिव ने अपना विवेक भी खो दिया। परिणाम यह हुआ कि किशोर समरीते की शिकायत के जो शब्द लिखे गए थे, प्रमुख सचिव ने अपनी प्रशासनिक भाषा का उपयोग न करते हुए समरीते द्वारा लिखे गए शब्दों का और तथ्यों का हुबहू इस्तेमाल करते हुए मुख्य अभियंता को जांच करने के सख्त आदेश दे डाले और यहीं से रायता फैल गया। सूत्रों का कहना है कि प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने अपने द्वारा दिए गए जांच के आदेश को मीडिया में भी लीक करवा दिया। जिसकी वजह से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में हड़कंप मच गया है तथा मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा मुख्यमंत्री का सचिवालय बेवजह उलझ गया है। सूत्रों का कहना है कि किशोर समरीते की शिकायतों में 100 प्रतिशत दम है। क्योंकि मुख्य सचिव के पदभार ग्रहण करने के बाद अनुराग जैन ने अपनी समीक्षा बैठक में जल मिशन में भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर पी. नरहरि को फटकार भी लगाई थी। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि ओएसडी द्वारा किया गया भ्रष्टाचार आदिवासी महिला मंत्री के लिए गले की हड्डी बन गया है। लेकिन प्रमुख सचिव पी. नरहरि के द्वारा गैरजिम्मेदारी से प्रशासनिक शब्दों का उपयोग मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा मुख्यमंत्री सचिवालय के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में स्पष्टीकरण देने की स्थिति में अनावश्यक रूप से लाकर खड़ा कर दिया है। ऐसा माना जाए तो चौंकिएगा मत।

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