Mon. May 25th, 2026

जाँच की चादर का ताना बाना ऐसे बुनो कि भ्रष्टाचार के गड्ढों को पूरी तरह ढक दे!

अभी हाल ही में ग्वालियर में रोड सकने के सड़क में गड्ढे होने के मामले मामले इस तरह ताबड़तोड़ हुए की इन गड्ढों की खबरों ने ग्वालियर नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार को पूरे देश के सामने उजागर कर दिया। जितनी तेजी से ग्वालियर चेतक पुरी सड़क पर हुए गड्ढों की खबरें पूरे देश में फैलें। शायद उतनी तेजी से तो आग भी नहीं फैलती। हालांकि जिला प्रशासन और ग्वालियर नगर निगम ने इस तरह की खबरों को रोकने का भरसक प्रयास तो किया लेकिन उनके सारे प्रयास धरे के धरे रह गए। और जब हर जगह प्रदेश सरकार की किरकिरी होने लगी तो जिला प्रशासन पर दबाव बनाया गया और हमेशा की तरह शासन प्रशासन ने मिलकर अपने भ्रष्टाचार के दिए से जांच के जिन्न को बाहर निकाल दिया।

हालांकि जिले के प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट मिडिया से बचते हुए चुपचाप से जाकर चेतक पुरी रोड कामू आयना कर नगर निगम के दो इंजीनियर को निलंबित करवा चुके हैं। और इस निलंबन के बाद ग्वालियर की जनता ने कार्रवाई की जो हँसी उड़ाई नि संदेह प्रभारी मंत्री और जिला प्रशासन उस हंसी का ही पात्र है। क्योंकि भ्रष्टाचार के इतने बड़े बड़े गड्ढे जब चीख चीख कर कह रहे हैं की गड़बड़ झाला बहुत बड़ा है तो फिर ना तो किसी जिम्मेदार जाने अधिकारी पर और ना ही सड़क बनाने वाले ठेकेदार पर एफआईआर की गई। और न ही किसी तरह का जुर्माना लगाया गया। अब जो भी कुछ होगा वह उस जांच के बाद होगा जो शासन प्रशासन ने तय की है। और, क्या होगा यह चाय जनता में से बुद्धिजीवी लोग भी तय कर चुके होंगे क्योंकि जांच का हश्र हमारे देश में सर्वविदित है। तमाम लोग तो अब जांच को सेटिंग का पर्यायवाची कहने लगे हैं।

अब सुनिए जांच दल में जो दो अधिकारी आए हैं उनकी दिनचर्या जाँच जाँच के दौरान किस प्रकार की रही। नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा और एनएचएआई से रिटायर्ड इंजीनियर आई के पांडेय इस जांच दल के सदस्य हैं और ग्वालियर में यह दोनों नगर निगम में लीपा। पोती करने वाले अधिकारियों के साथ ही चेतक पुरी रोड पर पहुंचे और उन्होंने वहां पहुंचकर स्वतंत्र रूप से जांच की या लीपा। पोती की यह बात जो कोशिनों ने जांच में लिखा है उसके बाद ही पता चलेगा। लेकिन नगर निगम के अधिकारी इस जांच दल। को जिस तरह से मीडिया से बचाते हुए अपना काफिला इधर उधर मोड़ते हुए निकलते नजर आए वह साफ बता रहा है कि नगर निगम इन अधिकारियों से वह सब कराना चाहता है जो वह हमेशा से करते आए हैं। नगरीय प्रशासन के प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा तो इतने योग्य नज़र आए। कि मीडिया ने जब उनसे पूछा कि चेतक पूरी सड़क बनाने वाली जेन एंड रॉय कंपनी के खिलाफ शिवपुरी में मामला दर्ज है और ठेकेदार ने कोई पत्र दिए थे तो साहब ने कहा कि इसकी उन्हें जानकारी ही नहीं है। उनका यह जवाब उनकी कर्तव्य शून्यता अकर्मण्यता या सीधे शब्दों में कहें तो अंडरस्टैंडिंग को स्व घोषित करता है।

जांच दल मैदान में उतरा हुआ है लेकिन उसकी मंशा क्या है? उसको कितना स्क्रिप्टेड करना है कितना स्वतः संज्ञान से करना है यह तो यह जांच दल के सदस्य या इन्हें भेजने वाले ही जानते हैं। और जिस तरह से इन सदस्यों ने बाल भवन में अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की और अपने सुझाव और ट्रेनिंग प्रेषित की उससे तो यही नजर आ रहा है की यह जांच केवल सुझावों तक सिमटकर रह जाएगी। और आखिरी में इन भ्रष्टाचार के गड्ढों कि लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार को केवल समझाइश देकर आगे भ्रष्टाचार के दूसरे गड्ढे छोड़ने के लिए सस सम्मान निर्दोष साबित कर दिया जाएगा। क्योंकि इन भ्रष्टाचार के गड्ढों के पीछे न केवल ठेकेदार न केवल नगर निगम के इंजीनियर बल्कि प्रशासन। के बड़े बड़े अन्य अधिकारी और नेता मंत्री तक शामिल हो सकते हैं और जब बंदर बांट सभी के बीच की गई हो तो फिर इन गड्ढों के ऊपर जांच की एक ऐसी चादर तो बिछानी ही होगी जिसमें इन सभी जिम्मेदारों कि भ्रष्टाचार के गड्ढे छुप जाएं, और शायर इस जांच में इसी का ताना बाना बुनने की शुरुआत हो चुकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *