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संगीत एवं कला विश्वविद्यालय का 18 वां स्थापना दिवस समारोह मंगलवार को आयोजित हुआ

ग्वालियर मध्य प्रदेश मंगलवार का दिन आईआईटीटीएम का सभागार संगीत की लहरियों से गुंजायमान दिखा, जिसमें युवा कलाकारों द्वारा कथक नृत्य से कृष्ण की छवियों और लीलाओं का वर्णन मंच से दिखाई दिया साथ ही कला की अन्य विधाओं का भी अद्भुत प्रदर्शन मंच से दिखाई दिया। अवसर था राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के 18वें स्थापना दिवस का। गायन, वादन, नृत्य से लेकर चित्रकला का प्रदर्शन विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं द्वारा किया गया। इसमें कष्णायन- नृत्य रूपक की प्रस्तुति सबसे खास रही, जिसे इंदौर से आई वरिष्ठ कथक गुरू डॉ. सुचित्रा हरमलकर के निर्देशन में 15 कलाकारों द्वारा प्रदर्शित किया गया। लगभग 50 मिनट की इस प्रस्तुति में कृष्ण की लीलाओं को कथक के माध्यम से दिखाया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ गणेश वंदना से हुआ। इसमें पश्चात सादरा ताल झपताल में हुई प्रस्तुति में श्री कृष्ण के जीवन के हर पहलू की दिखाया गया। फिर कृष्ण लीला द्वारा कृष्ण की गई लीलाओं और उनके उद्देश्यों को बताने की कोशिश की गई।

चतुरंग के माध्यम से कृष्ण और गोपियों का अद्भुत होली रास दिखाया गया। इन प्रस्तुतियों ने सभागार में बैठे हर कला रसिक का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर, विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर रहे। यशवंत इंदपुरकर विशेष रूप से मौजूद रहे।

विवि की ओर से कुलसचिव अरूण सिंह चौहान, वित्त नियंत्रक डॉ. आशुतोष खरे, कार्य परिषद सदस्य चंद्रप्रताप सिकरवार सहित डॉ. अंजना झा, डॉ. मनीष करवड़े, डॉ. संजय सिंह, डॉ. श्याम रस्तोगी, पीआरओ कुलदीप पाठक आदि मौजूद रहे। संचालन सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने किया।

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