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विराट और अनुष्का संत प्रेमानंद से मिलने पहुंचे अक्षय तृतीया पर्व पर गुरु के साथ सत्संग किया; दोनों की बाबा से यह पांचवीं मुलाकात

क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने सोमवार को अक्षय तृतीया पर अपने गुरु संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद लिया। दोनों ने प्रेमानंद महाराज का सत्संग भी सुना। यह उनकी 5वीं मुलाकात थी।IPL 2026 के बिजी शेड्यूल के बीच विराट और अनुष्का रविवार देर शाम ही वृंदावन पहुंच गए थे। दोनों होटल रेडिशन में ठहरे थे। सोमवार सुबह करीब 6 बजे संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम केलीकुंज पहुंचे। यहां वे करीब ढाई घंटे रहे।आश्रम से निकलकर वापस होटल पहुंचे। सुबह करीब 10 बजे विराट और अनुष्का होटल से बाहर आए और संत प्रेमानंद महाराज के गुरु संत हित गौरांगी शरण महाराज के वराह घाट स्थित आश्रम पहुंचे। यहां गुरु के दर्शन कर वापस होटल गए और करीब 11 बजे रवाना हो गए।

विराट-अनुष्का को प्रेमानंद ने क्या-क्या संत्सग सुनाया आश्रम में विराट और अनुष्का बेहद साधारण वेशभूषा और सादगी भरे अंदाज में नजर आए। किसी वीआईपी तामझाम के बिना दोनों ने आम श्रद्धालुओं की तरह जमीन पर बैठकर काफी देर तक महाराज जी के सत्संग को सुना।दोनों शांत रहे। कोई सवाल भी नहीं पूछा। सत्संग में आए लोगों ने संत प्रेमानंद से सवाल पूछे। जिसका जवाब विराट-अनुष्का सुनते दिखे। इस दौरान प्रेमानंद जी महाराज ने निर्मल मन और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया- शुद्ध अंतःकरण ही ईश्वर प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है।

3 सवाल और संत प्रेमानंद के जवाब जानिए…सवाल-

गुरुदेव भगवान ने मांग की है, ‘निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा’। गुरुदेव क्या केवल निर्मल मन हो जाने से भगवान की प्राप्ति हो जाएगी और निर्मल मन कैसे होता है?

प्रेमानंद महाराज का जवाब- निर्मल मन होने पर भगवान की प्राप्ति नहीं, निर्मल मन ही भगवान हो जाएगा। इन्द्रियाणां मनश्चास्मि, इंद्रियों में मैं मन हूं। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं, जब दर्पण मलीन होता है तो हमें उसमें कुछ दिखाई नहीं देता। लेकिन जैसे ही दर्पण साफ हुआ तो अपना प्रतिबिंब दिखाई देने लगता है। ऐसे जहां निर्मल मन हुआ तो उसी निर्मल मन में भगवान विराजमान हैं। योग, कर्म योग, भक्ति योग, अष्टांग योग ये सब मन को निर्मल करने का साधन है। ऋषि मुनियों से, साधु महात्माओं से मिलो। उनकी शरण में जाओ। उनके बताए हुए साधन को करो। आपका मन धीरे-धीरे निर्मल होने लगेगा।

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