आज है तीन साल में एक बार आने वाली पद्मिनी एकादशी, जानें इस व्रत से जुड़े जरूरी नियम
एकादशी का दिन का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना गया है। तीन साल में एक बार ऐसा होता है जब पद्मिनी एकादशी पड़ती है। इसे कमला एकादशी के नाम से भी पहचाना जाता है। ऐसा कहते हैं कि इस दिन जप, तप और दान करने से व्यक्ति को कई गुना फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस बात को नियमों के मुताबिक करना अनिवार्य है।
दरअसल पुरुषोत्तम मास में एकादशी होने की वजह से पद्मिनी एकादशी का व्रत साल तीन साल में एक बार ही आता है। ऐसा कहते हैं इस समय जो व्यक्ति व्रत करता है उसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होते हैं। इसका वर्णन पद्म पुराण में भी देखने को मिलता है। चलिए हम आपको व्रत की पूजा और दान के नियम बता देते हैं।
पद्मिनी एकादशी व्रत नियम
- पद्म पुराण के मुताबिक इस दिन व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करने चाहिए।
- अब हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन अगर पीले रंग के वस्त्र धारण किए जाएं तो शुभ माना जाता है।
- एकादशी के दिन अन्न का त्याग किया जाता है। इस दिन सात्विक भोजन करना फलदायक है।
- एकादशी के व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए और चावल का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
- इस दिन जो व्यक्ति भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करता है उसे पुण्य फल की प्राप्ति होती है। नदी के तट पर किया गया जाप दोगुना, गौशाला में किया गया सहस्र गुना और अग्निहोत्र गृह में किया गया हजार गुना और शिव मंदिर या तुलसी के पास किया गया जप लाख गुना फल देता है।
इन चीजों का करें दान
- पद्मिनी एकादशी के दिन अन्न और फल का दान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है।
- इस दौरान गर्मी अधिक होती है ऐसे में जल से भरा हुआ घड़ा, खरबूजा, तरबूज और मौसमी फल का दान करना चाहिए।
- गुड़ और तिल का दान भी इस दौरान सर्वोत्तम माना गया है।
- इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र, चप्पल और छाता जैसी चीजों का दान करें। इससे व्यक्ति को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है।
- इस दिन दीप दान का भी विशेष महत्व माना गया है। कम से कम 5 दीपक जरूर जलाएं।
