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कृषि वैज्ञानिकों की सलाह- धान का रकवा कम करें कम पानी वाली फसलें उगाएं, अलनीनो से नुकसान की आशंका

ग्वालियर जिले में कमजोर मानसून और सामान्य से कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि वैज्ञानिक अलनीनो के प्रभाव और लंबे शुष्क मौसम की आशंका को देखते हुए किसानों को धान के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलें बोने की सलाह दे रहे हैं। आमतौर पर जिले में लगभग 1 लाख 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है।

खरीफ सीजन के दौरान ग्वालियर जिले में धान की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। हालांकि, इस बार जुलाई महीने में अब तक बेहद कम वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अलनीनो प्रभाव के कारण इस साल कम बारिश और लंबे समय तक वर्षा अंतराल बने रहने की संभावना है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र कुशवाहा ने बताया कि ऐसी स्थिति में किसानों को धान की जगह कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की ओर रुख करना चाहिए

कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालियर द्वारा जारी एडवाइजरी में मूंग की विराट और शिखा किस्मों को उपयुक्त बताया गया है। उड़द के लिए आईपीयू-11 और आईपीयू-13 जैसी उन्नत किस्में लगाने की सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त, तिल की जीटी-5 और जीटी-6 जैसी सफेद दाने वाली किस्में भी किसानों के लिए बेहतर विकल्प हैं। ये फसलें लगभग 80 से 85 दिनों में तैयार हो जाती हैं और कम वर्षा की स्थिति में भी संतोषजनक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।

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