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निशुल्क मिले पट्टे के लिए अभी खर्च करने होंगे 90 हजार

रुद्रपुर। नजूल भूमि पर काबिज 2600 गरीबों को निशुल्क मालिकाना हक मिलने के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराने में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस चुकानी होगी। यह शुल्क 70 हजार से 90 हजार रुपये तक आ रहे हैं। कई लाभार्थियों ने सीएम से रजिस्ट्री शुल्क माफ करने की मांग की है। जिला प्रशासन की ओर से रजिस्ट्री शुल्क माफ करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। गरीब परिवारों को जमीन पर मालिकाना हक तो मिल गया अब समस्या जमीन की रजिस्ट्री को लेकर आ रहे खर्च की है। जमीन की रजिस्ट्री कराने में पांच फीसदी स्टांप ड्यूटी और दो फीसदी निबंधन शुल्क देना होता है। अधिकतम 90 हजार रुपये तक शुल्क जमा कर रजिस्ट्री हो सकेगी। गरीब तबके के लोगों में रजिस्ट्री शुल्क को लेकर फिक्र हो रही है। निवर्तमान मेयर रामपाल सिंह ने बताया कि कुछ महीने पहले उन्होंने रजिस्ट्री शुल्क माफी के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया था। इधर स्वामित्व पत्र कार्यक्रम में सीएम धामी से संवाद करने वाले वीरेंद्र तिवारी ने बताया कि जमीन पर मालिकाना हक मिलने से गरीब परिवार बेहद खुश हैं। पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने गरीबों के दर्द को अपना दर्द समझा और दशकों पुरानी मांग को पूरा किया। कहा कि बस्तियों में अधिकांश लोग गरीब हैं। उन्होंने गुजारिश की है कि मुख्यमंत्री जमीन की रजिस्ट्री शुल्क को माफ कर दें। वे इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।

2600 परिवारों को सीएम ने सौंपा था स्वामित्व पत्र
नजूल भूमि पर काबिज हजारों परिवार लंबे समय से मालिकाना हक की मांग कर रहे थे। इसको लेकर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति भी गठित की गई थी। कई सरकारों ने नजूल भूमि पर मालिकाना हक देने का वादा किया लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की सरकार ने वादे को पूरा किया। छह मार्च को मुख्यमंत्री धामी ने गांधी पार्क में पहले चरण में 2600 परिवारों को स्वामित्व पत्र सौंपे थे। बचे परिवारों की पत्रावलियां नगर निगम की ओर से तैयार हो रही है और 1200 फाइलों का दोबारा सत्यापन कार्य हो रहा है।

रजिस्ट्री शुल्क माफ करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और शासन को इस पर निर्णय लेना है लेकिन लोग स्वतंत्र है कि वे शुल्क जमा कर जमीन की रजिस्ट्री करा लें या फिर शासन के निर्णय का इंतजार कर लें। – उदयराज सिंह, डीएम।

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