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उज्जैन से वाया फतेहाबाद, रतलाम होकर चित्तौड़गढ़ चलेगी मेमू, दिल्ली से हरी झंडी

पहली बार महाकाल और महाराणा की नगरी को जोड़ने के लिए रेलवे उज्जैन से वाया फतेहाबाद, रतलाम होकर सीधे चित्तौड़गढ़ तक ट्रेन चलाएगा। मंडल के प्रपोजल को रेलवे बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है। खास बात यह है कि यह ट्रेन मेमू रैक से चलेगी, जिसमें 12 कोच रहेंगे। यह आईसीएफ कोच फैक्टरी चेन्नई से आना है, जहां पहले से वेटिंग चल रही है। यही वजह है कि मेमू रेक आने में दो से तीन माह का समय लग सकता है।

15 साल पहले चित्तौड़गढ़, नीमच, रतलाम के यात्रियों को वाया फतेहाबाद होते हुए उज्जैन की कनेक्टिविटी मिलती थी। यह 2006 में रतलाम-नीमच सेक्शन का आमान परिवर्तन होने से बंद हो गई थी। इसके बाद यात्रियों को खाचरौद, नागदा होकर उज्जैन जाना पड़ रहा था। उज्जैन-फतेहाबाद सेक्शन भी ब्राॅडगेज हो चुका है इसलिए रेलवे इस रूट से ज्यादा से ज्यादा ट्रेन चलाने की तैयारी में हैं।

जल्द ही 11 गाड़ियां और दौड़ने लगेंगी

महामारी में बंद हुई गाड़ियों को फिर शुरू करने के लिए रेलवे तेजी से काम कर रहा है। मंडल मुख्यालय ने लगभग 11 ट्रेनों को चलाने का प्रपोजल मुख्यालय भेज रखा है। इनमें डॉ. आंबेडकर नगर-रतलाम-डॉ.आंबेडकर नगर डेमू, रतलाम-चित्तौड़गढ़-रतलाम डेमू, रतलाम-आगरा फोर्ट-रतलाम, रतलाम-उदयपुर-रतलाम एक्सप्रेस, इंदौर-जयपुर लिंक-इंदौर एक्सप्रेस, इंदौर-बीकानेर-इंदौर महामना, इंदौर-गांधीनगर शांति एक्सप्रेस, रतलाम-नागदा-रतलाम पैसेंजर नागदा-उज्जैन-नागदा पैसेंजर, नागदा-बीना-नागदा पैसेंजर और नागदा-इंदौर-नागदा पैसेंजर शामिल हैं। मंजूरी मिल गई तो जुलाई में ही इनमें से कुछ ट्रेन चलने लगेगी।

उज्जैन-फतेहाबाद-रतलाम-चित्तौड़गढ़ ट्रेन की परमिशन आ गई है। यह मेमू रेक से चलेगी। यह रेक चेन्नई से आना है। इसमें कुछ समय लग सकता है।
-विनीत गुप्ता, मंडल रेल प्रबंधक, रतलाम

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