पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय से लगा थल केदार का जंगल और समुद्रतल से करीब 6312 मीटर की ऊंचाई पर स्थिल पंचाचूली क्षेत्र बायोडायवर्सिटी हेरिटेज एरिया (जैव विविधता धरोहर क्षेत्र) बनाया जाएगा। वन विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव बनाना शुरू कर दिया है। इसके बाद जंगल के प्रबंधन का जिम्मा ग्रामीण खुद संभालेंगे और वन विभाग विभिन्न शोध कार्य करेगा।
पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के नजदीकी थलकेदार जंगल और पंचाचूली क्षेत्र जैव विविधता धरोहर क्षेत्र बनाने के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया। वन विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर स्थित आठगांव शिलिंग क्षेत्र से थलकेदार जंगल की सरहद शुरू होती है। समुद्र तल से 4500 से 6000 फुट की ऊंचाई तक फैले इस जंगल की अंतिम सीमा चंपावत जिले के पंचेश्वर क्षेत्र तक है। यह जिले का अकेला ऐसा जंगल है, जिसके 70 प्रतिशत वृक्ष चौड़ी पत्ती वाले हैं। जैव विविधता से भरे इस जंगल में जल संग्रहण की जबरदस्त क्षमता है। पिथौरागढ़ नगर के साथ ही गुरना और आसपास के तमाम गांवों को इस जंगल से पानी मिलता है। कई जड़ी बूटियां इस जंगल में मिलती हैं। मानसूनी हवाओं को रोककर वर्षा कराने में भी इस जंगल का बड़ा योगदान है। तेंदुए सहित कई अन्य दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक वास है। पानी की भरपूर मात्रा होने के कारण पक्षियों का अद्भुत संसार इस जंगल में बसता है। पंचाचूली क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पंचाचूली उत्तराखंड के उत्तरी कुमाऊं क्षेत्र का एक हिम शिखर है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 6312 मीटर है। पंचाचूली वन क्षेत्र में बुरांश, खरसू, तिमसू, थुनेर आदि दुर्लभ वनस्पतियां और फूल पाए जाते हैं। राज्य पक्षी मोनाल, हिम तेंदुआ, तेंदुआ, भालू, भरल सहित कई अन्य दुर्लभ वन्यजीव भी पाए जाते हैं।
ये होंगे फायदे
कार्बन सोखने की क्षमता का आकलन
ऑक्सीजन उत्पादित करने की क्षमता
पेड़ों की सेहत की देखभाल
मृदा अपघटन का आकलन
ग्रामीणों को मिलेगा प्रबंधन का अधिकार
ग्रामीणों के लिए संचालित होंगे आजीविका संवर्धन के कार्यक्रम
इको टूरिज्म डेवलपमेंट
थलकेदार और पंचाचूली वन क्षेत्र को जैव विविधता धरोहर क्षेत्र बनाया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। प्रस्ताव बनने के बाद इसे सरकार को भेजा जाएगा, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। – कोको रोसे, डीएफओ, पिथौरागढ़।