रीसाइकल प्लास्टिक से बने ट्री गार्ड से पौधों की सुरक्षा
वन विभाग की कालसी स्थित अनुसंधान रेंज में प्रयोग के तौर पर पौधों की सुरक्षा के लिए रीसाइकल प्लास्टिक से बने ट्री गार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रयोग सफल रहा तो यह लोहे के ट्री गार्ड के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होंगे। विशेष बात यह है कि ट्री गार्ड तीन से चार साल के बीच स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं। वन विभाग प्रत्येक वर्ष प्रमुख मार्गों के किनारे पौधरोपण कार्यक्रम चलाता है। सड़क किनारे विभिन्न प्रजाति के पौधे रोपे जाते है। प्राय: पौधों की पशुओं से सुरक्षा के लिए लोहे के ट्री गार्ड लगाए जाते हैं। ये ट्री गार्ड महंगे भी होते हैं। पौधे के बड़े होने पर ट्री गार्ड नहीं हटाए जाते तो पौधे को भी नुकसान पहुंचाते हैं। पशु को नुकसान पहुंचने की भी आशंका बनी रहती है।रेंज अधिकारी कुलदीप पंवार ने बताया कि प्रयोग के तौर पर कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर रोपे गए 275 पौधों की सुरक्षा रीसाइकल प्लास्टिक से बने ट्री गार्ड से की गई है। मुख्य वन संरक्षक की देखरेख में यह कार्य किया जा रहा है। लोहे की ट्री गार्ड की तुलना में इनकी कीमत आधी से भी कम है। लोहे के ट्री गार्ड तैयार करने में करीब 700 रुपये तक खर्च आता है। वहीं रीसाइकल प्लास्टिक से बना ट्री गार्ड 250 रुपये में उपलब्ध हो रहा है।
रेंज अधिकारी कुलदीप कुमार ने बताया ट्री गार्ड पूरी तरह से इको फ्रेंडली है। यह लोहे का बेहतर विकल्प है। वैसे इसे पशु नहीं खाते, यदि खा भी ले तो उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
