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दून की 32 बहुउद्देशीय कोऑपरेटिव सोसाइटी हुईं कंप्यूटराइज

दून की कोऑपरेटिव सोसाइटियों की तस्वीर बदलने वाली है। सहकारिता विभाग ने इन्हें कंप्यूटराइज करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि, ढाई दर्जन से अधिक सोसाइटियां कंप्यूटराइज हो चुकी हैं। साथ ही बाकी सोसाइटियों में भी कार्य तेजी से हो रहा है। कोऑपरेटिव सोसाइटियों के कंप्यूटराइज होने से किसानों के साथ किसी प्रकार धोखा करना मुश्किल होगा।
जिला कोऑपरेटिव विभाग के मुताबिक, जिले मेें बहुउद्देशीय कोऑपरेटिव सोसाइटियों को कंप्यूटराइज करने की योजना धरातल पर आकार लेती दिखाई देने लगी है। दून में फिलहाल 39 कोऑपरेटिव सोसाइटियों का संचालन किया जा रहा है। इन सोसाइटियों से जिले के करीब डेढ़ लाख किसान जुड़े हैं। योजना के मुताबिक, पहले चरण में प्रॉफिट में चल रही सोसाइटियों को कंप्यूटराइज किया जाना है। शेष सोसाइटियों को बाद के चरणों में कंप्यूटराइज किया जाएगा। हालांकि, जिले में सभी सोसाइटियों की कमोबेश स्थित बेहतर है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कोऑपरेटिव सोसाइटियों के कंप्यूटराइज हो जाने से किसानों को खाद-बीज सब्सिडी, ब्याज पर छूट व लोन की एसएमएस के माध्यम से जानकारी मिलेगी। कागज की बचत होने से सोसाइटियों को धन की बचत हो सकेगी।
केंद्र, राज्य सरकार और नाबार्ड की ओर से फंड हो रहा आवंटित
योजना के मुताबिक, सोसाइटियों को कंप्यूटराइज करने के लिए केंद्र, राज्य सरकार और नाबार्ड की ओर से धनराशि आवंटित की जा रही है। यह धनराशि सभी सोसाइटी को दी जा रही है।

जिले की 32 कोऑपरेटिव सोसाइटी कंप्यूटराइज हो चुकी हैं और बाकी पर काम तेजी से चल रहा है। कंप्यूटराइजेशन के बाद किसानों के डाटा में पारदर्शिता आएगी। किसानों के साथ संस्था के भी समय, धन और श्रम की बचत होगी। – सुमन कुमार, एआर कोऑपरेटिव, देहरादून

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