जनता के हित में लिए महत्वपूर्ण फैसले, लौटाई सदन की गौरवशाली परंपरा, मप्र विधानसभा का पर्यावरण स्वस्थ, स्वच्छ और निष्पक्ष: नरेन्द्र तोमर
मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने राजनैतिक जीवन के समस्त अनुभवों को मप्र विधानसभा में सदस्यों को अनुशासित करने के लिए दांव पर लगा दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुई नरेन्द्र सिंह तोमर की यात्रा में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों की स्पष्ट झलक और पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मवाद और स्वामी विवेकानंद के जीवन की कार्यशैली, अनुशरण संभवत: विधायक से लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और संगठन के अध्यक्ष से लेकर राज्य तथा केन्द्र में केबिनेट मंत्री के रूप में उनके अनुभवों के संकलन में मप्र विधानसभा की गौरवशाली परंपराओं को लौटाने में अहम भूमिका निभाई है, इसमें संदेह नहीं है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल के इस प्रतिनिधि से कल देर रात एक लंबे साक्षात्कार में विस अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने यह दावा किया कि, मप्र विधानसभा का पर्यावरण स्वच्छ, स्वस्थ और निष्पक्ष अपनी पुरानी गौरवशाली परंपराओं के साथ वापस स्थापित हो गया है। एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि, 15 महीनों में अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल मप्र विधानसभा में जनता के हित में बड़े फैसलों को लागू करने में तथा प्रत्येक सत्रों में पूरे समय तक सदन को संचालित करने में हमें सफलता मिली है। विस अध्यक्ष ने कहा कि सदन को सुचारू रूप से संचालित करने और सदस्यों को अनुशासन में रहकर जनता के मुद्दों को बहस के माध्यम से सुलझाने के लिए जहां एक ओर सत्ता पक्ष को विपक्ष की बात सुनने के लिए मजबूर किया गया वहीं, विपक्ष की अमर्यादित भाषा के उपयोग को रोकने के लिए कठोरता से नियम पारित किये गये। विस अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के अनुसार 15 महीनों का कार्यकाल जहां एक ओर नए विधायकों के लिए प्रशिक्षण के साथ परिपक्वता का कारण बना वहीं दूसरी ओर सदन के नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जनता के हित में बिना बाधा के बड़े-बड़े फैसलों को लागू करने में सफलता हासिल की गई। उन्होंने कहा कि, विधानसभा कार्यवाही को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम को मजबूत किया। एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, विधानसभा परिसर में विशेष अभियान चलाया गया और विधानसभा में ‘ग्रीन इनिशिएटिव’ को भी लागू किया गया जिसमें पेपरलेस कार्यवाही और सौर ऊर्जा के उपयोग पर जोर दिया गया। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि मप्र विधानसभा अपनी गौरवशाली परंपराओं लेकर ठीक उसी तरह स्थापित हो गई जैसे किसी जमाने में सदन के नेता के रूप में मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और नेता प्रतिपक्ष सुंदरलाल पटवा हुआ करते थे। मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के जमाने में सामने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल गौर हुआ करते थे तब जो परंपराएं थीं और सदस्यों द्वारा अपना पक्ष रखने के तौर-तरीके थे उसे वापस तो लौटाया ही गया है लेकिन खास बात यह है कि, 15 महीनों के विधानसभा अध्यक्ष के रूप में नरेन्द्र सिंह तोमर का कार्यकाल इस बात के लिए रेखांकित करने लायक है कि, शिवराज के मुख्यमंत्री रहते-रहते सदन को हमेशा फटाफट विसर्जित करने में जो हड़बड़ाहट होती थी वैसी स्थिति अब नहीं है। अब तो नरेन्द्र सिंह तोमर के कार्यकाल में जनहित के मुद्दे पर बहस हो जाए, सदन पूरे समय तक चले और मप्र विधानसभा की गौरवशाली परंपराओं को पूरे देश में फिर से पूनर्स्थापित कर दिया गया है ऐसा माना जाए तो चौंकिएगा मत।
