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121 की मौत, 150 घायल, 3200 पेज की चार्जशीट… हाथरस भगदड़ के पीड़ितों को इंसाफ का इंतजार

हाथरस   हाथरस जिले का फुलरई गांव. गांव में भोले बाबा का सत्संग चल रहा था. लाखों की संख्या में लोग दूर-दूर से सत्संग सुनने आए थे.  कहते हैं, बाबा की चरण रज लेने के लिए लोग उनके पीछे भागे तो बड़ा हादसा हो गया. भगदड़ मच गई. लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए आगे बढ़े. इस हादसे में 121 लोगों की जान चली गई. 150 से ज्यादा घायल हो गए. आज इस दर्दनाक हादसे को एक साल पूरा होने पर एनडीटीवी की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया.

11 के खिलाफ चार्जशीट, पर जांच जारी

हाथरस भगदड़ मामले में पुलिस 11 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है, लेकिन पुलिस की विवेचना खत्म नहीं हुई है. इस घटना में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जो लगभग 11 महीने जेल में रहने के बाद अब जमानत पर बाहर हैं.

पुलिस ने अभी इस मामले में गिरफ्तार हो चुके आरोपियों के खिलाफ ही चार्जशीट पेश की है. सूत्रों के मुताबिक, अभी इस मामले में 71 आरोपियों के खिलाफ विवेचना जारी है. ऐसे में पुलिस इन आरोपियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल कर सकती है. इसे लेकर पुलिस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

3200 पेज की चार्जशीट, 676 गवाह

सिकंदराराऊ में मुगलगढ़ी के फुलरई गांव में 2 जुलाई 2024 को हुए सत्संग में भगदड़ की जांच सीओ सिटी रामप्रवेश राय ने की है. पुलिस की तरफ से इस मामले में 3200 पेज का आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया है. पुलिस ने घटना के 676 गवाह बनाए हैं.

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी देव प्रकाश मुधकर के अलावा मेध सिंह, मुकेश कुमार, मंजू देवी, मंजू यादव, राम लड़ेते, उपेंद्र सिंह, संजू कुमार, राम प्रकाश शाक्य, दुर्वेश कुमार, दलवीर सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. पुलिस ने भोले बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया था.

घटनास्थल पर ईंटों का ढेर, सन्नाटा

इस दर्दनाक हादसे को एक साल पूरा होने पर एनडीटीवी की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो घटनास्थल पर कुछ ईंटों का ढेर लगा हुआ मिला. आसपास प्लॉटिंग हो रही थी. कुछ खेतों में किसान धान की रोपाई कर रहे थे.

पुलिस ने इस घटना में जिस देव प्रकाश मधुकर को मुख्य आरोपी बनाया है, वह अपने घर पर ताला लगाकर घर से बाहर था. ऐसा लगा कि वह मीडिया से बात नहीं करना चाहता. बहरहाल यह मामला अभी अदालत की चौखट पर है और हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों और घायलों को अब भी इंसाफ का इंतजार है.

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