Fri. May 1st, 2026

6 महीने पहले सुरेश सोनी और डॉ. मोहन यादव ने लिखी थी पटकथा, कैलाश विजयवर्गीय, नरेन्द्र सिंह तोमर सहमत हुए, ऐसे बने हेमंत खंडेलवाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष

मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी को आज आधिकारिक रूप से हेमंत खंडेलवाल के रूप में प्रदेश का नया अध्यक्ष मिल जाएगा, लेकिन भाजपा संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जितना प्रचार करती है उससे ज्यादा उसके अनुपालन में शोध करती है और शोध करने में कभी- कभी साल-छह महीने भी लग जाते हैं। और हेमंत खंडेलवाल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वारा किए गए छह महीने तक के शोध का परिणाम है, ऐसा लिखा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में सूत्रों ने जो कहा है और जो मप्र के भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सांसद विष्णुदत्त शर्मा को पद मुक्त करने के बाद नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद जिम्मेदारी किसी ओर को नहीं दी गई। यह जिम्मेदारी केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सहमति से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठतम स्वयं सेवक सुरेश सोनी ने स्वयं यह जिम्मेदारी छह महीने पहले ओढ़ ली थी। यदि बैतूल में छह महीने पहले सुरेश सोनी के द्वारा हेमंत खंडेलवाल के निवास पर पड़ाव और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस पटकथा में अलग-अलग तीन बार बैतूल जाकर शामिल होने के बाद यह तय हो गया था कि, मप्र में भाजपा का नया अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को ही चुना जाएगा। और बाद में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर दोनों ने अलग-अलग मोकों पर बैतूल जाकर हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात करके उन्हें आंतरिक रूप से पार्टी का नेतृत्व करने के लिए तैयार कर लिया, लेकिन गोपनीयता इतनी बरती गई और 8-10 नाम ऐसे उछाले गए जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की कोई संभावना नहीं थी, लेकिन यह राजनीति मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव की कूटनीति का हिस्सा था। और जब कल हेमंत खंडेलवाल के नाम पर मुख्यमंत्री ने नामांकन का प्रस्ताव रखा तो हेमंत खंडेलवाल का समर्थन करने के लिए केवल कैलाश विजयवर्गीय सबसे आगे आए, इन्हीं घटनाओं से इस बात की पुष्टि होती है कि गृहमंत्री अमित शाह के कहने पर संघ के सुरेश सोनी ने हेमंत खंडेलवाल को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने के पहले संगठन के चरित्र को स्वच्छ एवं निष्पक्ष रखने का पाठ सिखाया, फिर मुख्यमंत्री को बुलाकर सत्ता और संगठन के बीच में तालमेल की प्रक्रिया को समझाया और वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय द्वारा बार-बार वैश्य समाज को संगठन में प्राथमिकता देने के सुझाव को अमल में लाया, तब जाकर आज मप्र भाजपा को अपने नए अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ताजपोशी के लिए भाजपा कार्यालय में उत्सव मनाने वाली है। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि, मप्र भाजपा के नए अध्यक्ष पद के लिए बैतूल के विधायक दो बार के सांसद, संगठन के अनेक पदों पर अनुभवी रहे हेमंत खंडेलवाल का नाम आज कल में ही तय नहीं हुआ है। इसका मतलब यह है कि, मप्र भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को बनाने की पटकथा छह महीने पहले मुख्यमंत्री की पसंद से संघ के वरिष्ठ नेता सुरेश सोनी ने कैलाश विजयवर्गीय और नरेन्द्र तोमर की सहमति से बैतूल में ही जाकर लिख दी थी, ऐसा माना जाए तो चौंकिएगा मत।

भाजपा ने 6 राज्यों के प्रदेशाध्यक्षों का किया ऐलान:
भाजपा ने मंगलवार को संगठन स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए छह राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी। इनमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्य प्रदेश शामिल हैं। सभी नियुक्तियां निर्विरोध हुईं। मध्य प्रदेश में हेमंत विजय खंडेलवाल ने निर्विरोध नामांकन भरा है। इन नियुक्तियों के साथ भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की दिशा भी साफ हो गई है। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि 50 प्रतिशत राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का चयन न हो जाए। भाजपा की कुल 37 राज्य इकाइयां हैं, जिनमें से अब तक 14 में चुनाव हो चुके थे और 19 और राज्यों में अध्यक्ष चुने गए। इससे स्पष्ट है कि जुलाई में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष तय किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश में भाजपा ने एक बार फिर राजीव बिंदल पर भरोसा जताया है। बिंदल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और संगठन के साथ- साथ सरकार में भी उनकी पकड़ मानी जाती है। उत्तराखंड में महेंद्र भट्ट को लगातार दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भट्ट को दोबारा मौका देकर भाजपा ने यह संकेत दिया है कि पार्टी राज्य में नेतृत्व में स्थायित्व और निरंतरता चाहती है। तेलंगाना में एन. रामचंदर राव को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, हालांकि इस फैसले का विरोध भी हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *